बेंगलुरु की फिल्म सोसाइटी आंदोलन में जॉर्ज कट्टी का नाम हमेशा सम्मानपूर्वक लिया जाएगा। बेंगलुरु फिल्म सोसाइटी के प्रेरक और दीप फोकस मैगज़ीन के संपादक के रूप में उन्होंने समाज को सोचने पर मजबूर करने वाली और सामाजिक रूप से प्रासंगिक फिल्मों को प्रमुखता दी। उनकी प्रतिबद्धता और जुनून ने शहर के सिनेप्रेमियों को ऐसी गुणवत्ता वाली फिल्मों से परिचित कराया जो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम भी थीं।
जॉर्ज कट्टी ने न केवल फिल्मों को प्रदर्शित किया, बल्कि फिल्मों के माध्यम से सामाजिक संरचनाओं, सांस्कृतिक विविधताओं और नैतिक मुद्दों पर चर्चा को भी बढ़ावा दिया। उनकी संपादकीय नीतियाँ और फिल्म चयन प्रक्रिया स्पष्ट रूप से दर्शाती थीं कि वे केवल कला के लिए कला नहीं चाहते थे, बल्कि फिल्म को सामाजिक जागरूकता और आलोचना का उपकरण भी बनाना चाहते थे।
बेंगलुरु फिल्म सोसाइटी के जरिये जॉर्ज कट्टी ने अनेक स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की फिल्मों को यहां के दर्शकों तक पहुंचाया, जिससे समाज के विभिन्न तबकों के बीच संवाद स्थापित हुआ। उनकी यह पहल फिल्म देखने के अनुभव को बदलकर, सोचने और समझने का अवसर बन गई। रोमांचक, चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील विषयों को लेकर बनाई गई फिल्मों ने समाज को आत्ममंथन और सुधार की ओर प्रेरित किया।
दीप फोकस मैगज़ीन के संपादक के रूप में जॉर्ज कट्टी ने फिल्म समीक्षा और आलोचना के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने फिल्मों के तकनीकी, थीमेटिक और सृजनात्मक पहलुओं को गहराई से समझने और समझाने का काम किया, जिससे पाठक और दर्शक दोनों का सिनेमाई दृष्टिकोण विस्तृत हुआ। उनकी लेखनी ने फिल्म प्रेमियों को नए विचारों और मान्यताओं से अवगत कराया।
जॉर्ज कट्टी की दूरदृष्टि और सामाजिक प्रतिबद्धता ने बेंगलुरु की सांस्कृतिक गतिविधियों और कला जगत को समृद्ध बनाया। उन्होंने यह साबित किया कि फिल्मों का क्षेत्र सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और सांस्कृतिक संवाद का सशक्त माध्यम हो सकता है। उनकी यादें और योगदान लंबे समय तक याद किए जाएंगे, और वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

