पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी संस्कृति और राष्ट्रीयता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने सभी राज्य-शासित और सहायता प्राप्त स्कूलों में सुबह की सभा के दौरान “बंगलर माटी, बंगलर जल” राज्य गीत गाने को अनिवार्य कर दिया है। यह नोटिफिकेशन तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नवम्बर 2025 के आदेश के तहत जारी किया गया है।
इस फैसले का उद्देश्य विद्यालयों में छात्रों में राज्य के प्रति आत्मीयता और एकता की भावना को बढ़ावा देना है। “बंगलर माटी, बंगलर जल” गीत बंगाल की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है और इसे गाने से विद्यार्थियों में अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस होगा।
सरकार की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि राज्य द्वारा संचालित या सहायता प्राप्त सभी शैक्षणिक संस्थान इस आदेश का पालन करेंगे। इससे पहले इन विद्यालयों में विविध प्रकार के राष्ट्रगान या देशभक्ति गीतों का गायन होता था, लेकिन अब यह एकरूपता लाने के लिए राज्य गीत को अनिवार्य किया गया है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम युवाओं में देश तथा राज्य के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना पैदा करेगा। इसके साथ ही, यह भारत के समृद्ध सांस्कृतिक विविधता में बंगाल की विशिष्टता को भी प्रदर्शित करता है।
बंगाल के शिक्षकों और अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। कई शिक्षक मानते हैं कि इसके कारण बच्चों में अनुशासन और राष्ट्रीयता की भावना अधिक मजबूत होगी। साथ ही, यह विद्यार्थियों के कल्चरल एजुकेशन में भी सहायक सिद्ध होगा।
हालांकि, कुछ वर्गों ने भी इस आदेश पर अपने विचार प्रकट किए हैं, लेकिन अधिकतर लोग इस फैसले को सकारात्मक मान रहे हैं। भविष्य में इस तरह के प्रयास राज्य के युवा वर्ग को अपनी सांस्कृतिक विरासत और इतिहास के प्रति और अधिक जागरूक बनाने में मदद करेंगे।
इस नई नीति के साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सांस्कृतिक रणनीति को और मजबूत किया है, जिससे राज्य के छात्र अपनी पहचान को बेहतर तरीके से समझ सकें।

