एक काला-से-बेलाघ फिल्म के 200 दिनों तक सफलतापूर्वक चलना अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है, और इस उपलब्धि में इलैयाराजा द्वारा रचित गीतों का महत्वपूर्ण योगदान था, ऐसा अभिनेता शिवकुमार कहते हैं।
तमिल सिनेमा में ‘अन्नाकिली’ का अपना एक विशेष स्थान है। यह फिल्म न केवल अपनी कहानी और पात्रों के लिए जानी जाती है, बल्कि इसकी संगीत रचना ने भी इसे असाधारण बनाया। इलैयाराजा के संगीत ने फिल्म को जीवंतता प्रदान की और दर्शकों के दिलों को छू लिया।
शिवकुमार ने बताया कि उस समय ब्लैक-एंड-व्हाइट फिल्में सामान्य थीं, लेकिन ‘अन्नाकिली’ की सफलता ने यह साबित कर दिया कि गुणवत्ता और संगीत की ताकत से किसी भी फिल्म को सम्मोहित किया जा सकता है। 200 दिनों तक फिल्मों का सफल प्रदर्शन होना उस दौर में बहुत दुर्लभ था और यह दर्शाता है कि दर्शकों ने फिल्म को कितनी पसंद किया।
इलैयाराजा के संगीत ने न केवल तमिल सिनेमा में क्रांतिकारी बदलाव लाए, बल्कि उन्हें दक्षिण भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में एक महानायक के रूप में प्रतिष्ठित किया। ‘अन्नाकिली’ के गीत आज भी लोकप्रिय हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा सिद्ध होते हैं।
यह फिल्म और इसके संगीत ने तमिल फिल्म उद्योग के लिए नए मार्ग खोले, जिससे कई संगीतकारों और फिल्म निर्माताओं को प्रेरणा मिली। शिवकुमार के अनुसार, इलैयाराजा का संगीत फिल्म की जान था और इसके बिना वह इतनी सफल नहीं हो पाती।
समापन करते हुए, यह कहा जा सकता है कि ‘अन्नाकिली’ न केवल एक फिल्म थी, बल्कि एक सांस्कृतिक घटना भी थी जिसने तमिल सिनेमा को एक नई दिशा दी। 50 साल बाद भी इसका प्रभाव और लोकप्रियता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जो इलैयाराजा के संगीत की अमरता का प्रमाण है।

