भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ द्वारा भोजशाला मामले में दिया गया फैसला प्रदेश में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को इस फैसले पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इससे भोजशाला में श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना का वैध अधिकार मिलेगा।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भोजशाला राजा भोज द्वारा बनवाया गया था और यह परिसर एक मंदिर स्वरूप का है। यह निर्णय लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समापन करते हुए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की पुष्टि करता है।
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह निर्णय हमारी सांस्कृतिक विरासत और आस्था का सम्मान है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण तथा प्रबंधन में भोजशाला की गरिमा और भी सुदृढ़ होगी। इससे प्रदेश के श्रद्धालुओं को अपनी पूजा-अर्चना की भावना को खुले मन से निभाने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में भोजशाला की सरस्वती प्रतिमा लंदन के संग्रहालय में रखी गई है। उन्होंने केंद्र सरकार को मां वाग्देवी की इस प्रतिमा को भारत वापस लाने पर गंभीरतापूर्वक विचार करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार भी इसे सफल बनाने के लिए आवश्यक प्रयास करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक परंपरा सदैव ‘सर्वधर्म समभाव’ और सामाजिक सौहार्द की मिसाल रही है। वे न्यायालय के इस निर्णय का पूर्ण सम्मान करते हैं और प्रदेश में सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक गौरव को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राज्य सरकार निर्णय के प्रभावी कार्यान्वयन में पूरी सहायता प्रदान करेगी।
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री डॉ. स्वप्ना वर्मा ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय न्यायपालिका पर हिंदू समाज की गहरी आस्था को और मजबूत करेगा। इस फैसले से धार स्थित भोजशाला में मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना का अधिकार सुनिश्चित हुआ है, जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा होगी।
सभी पक्षों के लिए यह निर्णय सम्मान और न्याय का प्रतीक है। न्यायालय के इस फैसले के चलते भोजशाला का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व और भी उजागर होगा, जिससे आने वाले समय में श्रद्धालु बिना किसी विघ्न के अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन कर सकेंगे। प्रदेश सरकार भी इस दिशा में आवश्यक समर्थन देगी ताकि भोजशाला की प्रतिष्ठा और महत्ता को बनाये रखा जा सके।

