जयपुर। राजस्थान में नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (नीट) के पेपर लीक होने के विवाद ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मामले में राष्ट्रीय एजेंसी एनटीए की कार्यशैली पर तीखे हमला बोला है और आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार लाखों छात्रों के सपनों को जमीं पर गिरा रही है।
डोटासरा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की इस महत्वपूर्ण परीक्षा की जिम्मेदारी एक ऐसी संस्था को देना संदेहास्पद है, जिसे वे ‘एनजीओ जैसी संस्था’ कहते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं और फिर भी इस परीक्षा का संचालन करने वाली एजेंसी पर कार्रवाई नहीं हो रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में हुए नीट-2026 के पेपर लीक मामले में राजस्थान में सत्ताधारी भाजपा नेताओं की संलिप्तता भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि भाजपा के कई नेता इस घपले में शामिल हैं, लेकिन जांच में उनकी रक्षा की जा रही है। डोटासरा ने कहा कि जब केंद्रीय नेतृत्व पेपर लीक माफिया को खत्म करने का दावा करता है, तो यह सुनकर हैरानी होती है कि राजस्थान में लगातार ऐसे मामले क्यों हो रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के बयान भी साझा किए, जिनके अनुसार सत्ताधारी दल इसे मामूली घटना बताने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने इस मामले को ‘केरल से शुरू हुआ’ बताकर स्थानीय घटनाओं को दबाने की कोशिश की, जबकि राज्य के शिक्षा मंत्री ने भी पेपर लीक को लेकर उदासीनता दिखाई।
डोटासरा ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सिर्फ नीट-2026 ही नहीं, बल्कि पिछले वर्षों 2024 और 2025 की परीक्षाएं भी पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि 2025 के पेपर लीक मामले में राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप जांच करने में असमर्थ रहा और एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जिससे आरोप हैं कि जांच को प्रभावित किया गया।
गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि 2026 के पेपर लीक की जांच के दौरान जयपुर जिले के जमवारामगढ़ के दो व्यक्तियों और उनके परिवार के अन्य सदस्यों की संलिप्तता सामने आई है। आरोप है कि उन्होंने बार-बार परीक्षा के प्रश्न पत्रों को पैसे लेकर बेचते रहे। इसके अलावा उन्होंने बताया कि इन परिवारों के बच्चों के अंकों में असामान्य वृद्धि देखी गई, जो बिना कोचिंग के भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाने के लिए संदिग्ध है।
डोटासरा ने केंद्र सरकार से यह सवाल भी किया कि क्या छात्रों के भविष्य से खेलना उचित है और क्यों महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाओं का संचालन तयशुदा एजेंसियों के बजाय एनटीए जैसी संस्थाओं को सौंपा जा रहा है, जिनकी विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई की बेहद आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी भी छात्र का अधिकार न छीना जा सके।
इसलिए, कांग्रेस की मांग है कि नीट परीक्षा की सुरक्षा और प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाया जाए और लीक की घटनाओं पर तुरंत और कड़ी कार्रवाई हो। उनके अनुसार, विद्यार्थियों की मेहनत और सपनों का सम्मान करना शिक्षा प्रणाली की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

