भाखड़ा बीस मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) के अधीन बांधों के जलाशयों में अधिकतम जल संग्रहण क्षमता तक पानी संग्रहीत करने के लिए उचित निर्णय त्वरित गति से लेने की आवश्यकता पर बल दिया गया है। मंत्री ने कहा कि संबंधित आवश्यक अध्ययन पूर्ण होने के बाद इस दिशा में उचित कदम उठाए जाने चाहिए ताकि जल प्रबंधन और संसाधन उपयोग में सुधार हो सके।
बीबीएमबी का प्रबंधन तीन राज्यों—पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान—का साझा दायित्व है। इनमें से राजस्थान लंबे समय से बोर्ड में स्थायी सदस्यता की माँग करता रहा है ताकि उसकी भागीदारी और अधिकारों का व्यापक रूप से संरक्षण सुनिश्चित हो सके। मंत्री ने इस मुद्दे को लेकर स्पष्ट किया कि जल संसाधनों का सुव्यवस्थित प्रबंधन न केवल कृषि और घरेलू जरूरतों के लिए आवश्यक है, बल्कि भविष्य में जल सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
जल संयंत्रों के जलाशयों में जल स्तर बढ़ाने के फैसले पर्यावरणीय, तकनीकी और सामाजिक पहलुओं को ध्यान में रखकर ही लिए जाने चाहिए। इसी संदर्भ में, मंत्री ने कहा कि विस्तृत और तथ्यात्मक अध्ययन अत्यंत आवश्यक हैं, जिनके आधार पर जल संचयन को अधिकतम स्तर तक ले जाने के लिए निर्णायक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने आग्रह किया कि संबंधित विभाग शीघ्रता से इन अध्ययनों को पूरा करें ताकि निर्णय प्रक्रिया में विलंब न हो।
राजस्थान की मांग है कि उसे भी बोर्ड में स्थायी सदस्य बनाकर प्रबंधन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी दी जाए। यह कदम न केवल न्यायसंगत होगा, बल्कि राज्य की जल सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा। इस प्रकार, बोर्ड के भीतर सभी राज्यों के बीच संतुलित सहयोग और पारदर्शिता आवश्यक है ताकि जल संबंधी विवादों का समाधान निकाला जा सके और संसाधनों का न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित हो सके।
मंत्री का यह भी कहना था कि जलाशयों के जल स्तर में वृद्धि से सिंचाई के लिए जल उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी बल मिलेगा। साथ ही, जल संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करना आवश्यक बताया गया। उन्होंने समन्वित प्रयासों से जल संकट से निपटने की गरंथना की उम्मीद जताई।

