तीन घंटे से चल रहा है… नासिक में हाईवोल्टेज ड्रामा, दो बड़े नेता रुके; गोकुल गीता हटेगी या झूलेगी

Rashtrabaan

    विधानसभा चुनाव को लेकर नासिक में तनावपूर्ण माहौल है. इधर, महागंठबंधन की ओर से शिवसेना नेता नरेंद्र दराडे को नामांकन मिला है, जबकि बीजेपी के गोकुल गीते ने बगावत कर स्वतंत्र रूप से अपनी उम्मीदवारी दाखिल की है. इस स्थिति के कारण नासिक में राजनीतिक मामले केंद्रीकृत हो गए हैं और दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने गीते के फैसले को प्रभावित करने की कोशिश की है।

    तीन घंटे की बातचीत और राजनीतिक दबाव

    भाजपा मंत्री गिरीश महाजन और शिवसेना नेता उदय सामंत ने आज नासिक में गोकुल गीते से मुलाकात की। बैठक करीब तीन घंटे तक चली, इस दौरान गीता की ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया. उन्होंने नरेंद्र दराडे से अपना समर्थन वापस लेने का कोई संकेत नहीं दिया. इससे समर्थकों और विरोधियों के बीच हाई वोल्टेज राजनीतिक माहौल बन गया है.

    प्रेस कॉन्फ्रेंस और खुलासे की उम्मीद

    बैठक के बाद गोकुल गीते, उदय सामंत और गिरीश महाजन एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए तैयार हैं. इस सम्मेलन में गीते की अगली राजनीतिक नीति का खुलासा होगा. प्रेस कॉन्फ्रेंस की घोषणा के बाद नासिक समेत पूरे राज्य में इस पर विशेष ध्यान दिया गया है. समझा जाता है कि गोकुल गीते ने नरेंद्र दराडे के बेटे कुणाल दराडे के प्रति भी अपनी नाराजगी व्यक्त की है, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

    शहर के राजनीतिक भविष्य पर असर डाल रहा फैसला

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकल पाया है। महागठबंधन के दो अलग-अलग दलों के मंत्री भी गोकुल गीते से बातचीत कर रहे हैं और गीते क्या भूमिका निभाते हैं यह अब राज्य के राजनीतिक हलकों में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। फैसले के विवाद से नासिक की राजनीति गरमा गई है और अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले चुनाव में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. नासिक में हुए हाईवोल्टेज ड्रामे ने राज्य में राजनीतिक सौहार्द की उम्मीदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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