मंडला। एक तरफ जहां केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारें ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और महिला सशक्तिकरण का ढिंढोरा पीटते नहीं थकतीं, वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश के मंडला जिले से सत्ताधारी दल के एक रसूखदार युवा नेता की ऐसी करतूत सामने आई है, जिसने पार्टी के अनुशासित और संस्कारी होने के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। मंडला के भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के दिग्गज नेता उत्कर्ष यादव पर उनकी ही धर्मपत्नी ने दहेज के लिए क्रूरता, मारपीट और गंभीर मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। पीड़ित महिला ने न्याय के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया है, लेकिन आरोप है कि सत्ता की धमक के आगे पुलिसिया कार्रवाई की रफ्तार कछुए से भी धीमी हो चुकी है।
पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों के मुताबिक, उत्कर्ष यादव का परिवार दहेज के लालच में अंधा हो चुका है। शादी के समय पीड़िता के परिवार ने अपनी हैसियत से बढ़कर लाखों रुपये लग्न-समारोह में खर्च किए और गृहस्थ जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक सारा साजो-सामान सम्मान सहित दिया था। लेकिन उत्कर्ष यादव की भूख इतने से नहीं मिटी।
आरोप है कि उत्कर्ष और उनके परिजनों द्वारा लगातार एक ‘महिंद्रा थार’ गाड़ी की मांग की जा रही थी। जब मायका पक्ष इस भारी-भरकम मांग को पूरा करने में असमर्थ रहा, तो उत्कर्ष यादव का कथित ‘दहेज लोभी’ रूप सामने आ गया। पीड़िता के साथ न केवल गाली-गलौज और मारपीट की गई, बल्कि अंततः उसे प्रताड़ित कर मायके में लाकर छोड़ दिया गया। एक विवाहिता का जीवन सिर्फ इसलिए दांव पर लगा दिया गया क्योंकि उसका परिवार एक आलीशान गाड़ी देने में असमर्थ रहे।
सत्ता की धमक में दबी पीड़िता की आवाज!
दहेज के इस दंश से टूट चुकी पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर न्याय की आस में पुलिस प्रशासन से गुहार लगाई है। लेकिन विडंबना देखिए कि जिस देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े कानून हैं, वहां मंडला में यह शिकायत सिर्फ ‘शोभा की सुपारी’ बनकर रह गई है। सूत्रों का कहना है कि आरोपी नेता का रसूख इतना तगड़ा है कि पुलिस भी हाथ डालने से कतरा रही है। सत्ता के गलियारों से मिल रहे संरक्षण के कारण पीड़िता की चीख शासन-प्रशासन के बहरे कानों तक नहीं पहुंच पा रही है। क्या मध्य प्रदेश में सत्ताधारियों के लिए कानून अलग है? अगर आरोपी भाजपा का नेता न होता, तो क्या पुलिस अब तक मूकदर्शक बनी रहती? यह सवाल आज मंडला की जनता प्रशासन से पूछ रही है।
फग्गनसिंह और कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके का खास हैं उत्कर्ष!
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और गंभीर पहलू यह है कि दहेज प्रताड़ना का यह आरोपी कोई आम कार्यकर्ता नहीं, बल्कि मंडला भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का अत्यंत चहेता माना जाता है। राजनैतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि उत्कर्ष यादव को भाजपा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गनसिंह कुलस्ते और सूबे की कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके का सीधा वरदहस्त और आशीर्वाद प्राप्त है।
वर्तमान में मंडला में भाजयुमो (युवा मोर्चा) के जिलाध्यक्ष पद के लिए चयन की प्रक्रिया चल रही है। सूत्रों का दावा है कि कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके ने उत्कर्ष यादव को अपनी पहली पसंद बताते हुए उन्हें जिलाध्यक्ष बनाने की तगड़ी पैरवी की है। वहीं, सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते भी इस दागी चेहरे पर मेहरबान बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भाजपा के इन बड़े दिग्गजों को एक महिला की अस्मत, उसका दर्द और कानून की धज्जियां उड़ता दिखना बंद हो गया है?
भाजपा की कथनी और करनी का अंतर उजागर
यह मामला केवल एक परिवार के विवाद का नहीं है, बल्कि यह भाजपा की आंतरिक राजनीति और उसकी विचारधारा पर एक बड़ा सवालिया निशान है। एक तरफ भाजपा खुद को संस्कारों, अनुशासन और महिलाओं की रक्षक बताने वाली पार्टी कहती है। वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी महिला के प्रताड़क को, जिसने अपने गृहस्थ सपनों को दहेज की वेदी पर बलि चढ़ते देखा, उसे जिले के युवाओं का नेतृत्व सौंपने की तैयारी की जा रही है!
यदि मंडला भाजपा के दिग्गज ऐसे गंभीर आरोपों से घिरे व्यक्ति को भाजयुमो का जिलाध्यक्ष बनाने के लिए अड़े हुए हैं, तो यह सीधे तौर पर उनकी महिला विरोधी और सामंती मानसिकता को उजागर करता है। यह साफ करता है कि सत्ता के नशे में चूर नेताओं के लिए बेटी सम्मान सिर्फ एक चुनावी नारा है, हकीकत में वे अपनों के दाग धोने में ही व्यस्त हैं।
नजरें अब पुलिस और संगठन पर
अब देखना यह होगा कि मंडला पुलिस इस रसूखदार नेता के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करने की हिम्मत जुटा पाती है या फिर सत्ता के दबाव में इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। दूसरी ओर, क्या भाजपा का शीर्ष नेतृत्व (प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री) मंडला के इन दिग्गजों की मनमानी पर रोक लगाएगा या फिर एक दहेज के आरोपी के सिर पर जिलाध्यक्ष का ताज सजेगा? मंडला की जनता और पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठा है।
इन बिन्दुओ पर खड़े कुछ सवाल
- आरोप: भाजयुमो नेता उत्कर्ष यादव पर पत्नी को थार गाड़ी के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप।
- पीड़िता का दर्द: लाखों के लग्न और गृहस्थी के सामान के बाद भी बेटी को मायके में छोड़ा।
- राजनीतिक गलियारों में चर्चा: केंद्रीय नेताओं के करीबी होने के कारण पुलिस कार्रवाई पर उठ रहे सवाल।
- कथनी और करनी पर सवाल: महिलाओं के सम्मान का दावा करने वाली भाजपा के दिग्गज क्या एक दागी चेहरे को सौंपेंगे भाजयुमो की कमान?
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