विजयपुरा में कानेरी मठ के सेर के आगमन को लेकर लिंगायत संगठनों ने विरोध जताया है। इन संगठनों का आरोप है कि मठ सेर ने अन्य संतों का अपमान किया है और बसावन्ना के नाम का गलत उपयोग हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है।
लिंगायत समुदाय के अनेक प्रमुख व्यक्तियों और संगठनों ने इस कदम को स्वीकार्य नहीं माना और चेतावनी दी है कि यदि कानेरी मठ सेर ने अपनी विवादित गतिविधियों को जारी रखा तो वे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इनके मुताबिक, संतपरंपराओं का सम्मान करना चाहिए और किसी के नाम का गलत राजनीतिक प्रयोग नहीं होना चाहिए।
यह विवाद तब भड़का जब कानेरी मठ के सेर ने बसावन्ना की विरासत को अपने एजेंडा के लिए इस्तेमाल करते हुए हिंदुत्व को प्रचारित करना शुरू किया। लिंगायत संगठनों ने इसे संतों के बीच भाईचारे और धार्मिक समरसता के लिए खतरा बताया है।
लिंगायत जनविश्वास संघ के अध्यक्ष ने बताया कि,”हम किसी भी प्रकार के धार्मिक अपमान और समुदाय के प्रतिष्ठित संतों के नाम के गलत इस्तेमाल के खिलाफ हैं। यह न केवल हमारी आस्था के खिलाफ है बल्कि सामाजिक सौहार्द्र को भी नुकसान पहुंचाता है।”
वहीं, कानेरी मठ के पक्ष में खड़े कुछ युवा समर्थकों का कहना है कि उनका उद्देश्य धर्म और संस्कृति को बचाना है, लेकिन विरोधी इसे राजनीतिकरण कर रहे हैं। इस स्थिति में दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, जिससे सामाजिक स्थिरता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान संवाद और सहमति से निकल सकता है। विभिन्न लिंगायत समाज के प्रतिनिधि और धार्मिक विशेषज्ञ जल्द ही एक बैठक करने की योजना बना रहे हैं ताकि दोनों पक्षों के मतभेद दूर किए जा सकें और शांति स्थापित हो सके।
अंततः यह मामला न केवल धार्मिक आस्था का मुद्दा है बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक सम्मान का भी विषय बन चुका है। सामुदायिक संगठनों की मांग है कि विवाद से बचने के लिए सभी धर्मगुरुओं को अपने वक्तव्यों एवं व्यवहार में संयम बरतना चाहिए और समुदाय के अन्दर सौहार्द्र बनाए रखना चाहिए।

