छिंदवाड़ा, राष्ट्रबाण। चुनाव पूर्व पुरे देश में कांग्रेसी नेताओ में कांग्रेस के प्रति विश्वास कमजोर हो रहा है। लंबे समय से सत्ता से दूर कांग्रेस सत्ता के लिए झटपटा रही है लेकिन मोदी लहर से हताश कांग्रेसी नेता अपने ही कुनबे को छोड़कर जाने को मजबूर है। कांग्रेसी नेताओ का पार्टी छोड़ने के पीछे के कई कारण माने जा रहे है। कोई इसे मोदी-शाह की प्राइवेट एजेंसी के रूप में सीबीआई, आईबी का उपयोग बता रहा है तो कुछ लोग इसे कांग्रेसी नेताओ की हताशा बताने से नहीं चूक रहे है। आगामी लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस में भगदड़ का सिलसिला जारी है। शहर से लेकर पूरे जिले के कांग्रेसी नेताओं का भाजपा में जाने का सिलसिला जारी है। वहीं भाजपा के नेतागण भी उनका पूरी गर्मजोशी के साथ स्वागत कर रहे हैं। लगातार 44 सालों से छिंदवाड़ा लोकसभा में कमलनाथ एवं उनके पुत्र नकुलनाथ अपराजित हैं। ऐसे में छिंदवाड़ा जिला कमलनाथ के गढ़ से जाना जाने लगा है। लेकिन कमलनाथ के इस गढ़ पर इस बार संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दरअसल पिछले 1 सप्ताह में 1 हजार से अधिक कांग्रेसी नेता भाजपा की सदस्यता ले चुके हैं। इन कांग्रेसी नेताओं में कोई भी छोटा नाम नही है। पूर्व विधायक से लेकर जनपद अध्यक्ष एवं कमलनाथ के करीबी माने जाने वाले प्रदेश प्रवक्ता तक शामिल है। कांग्रेस में लगातार दलबदल की राजनीति के चलते छिंदवाड़ा सीट पर होने वाले आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सासंद नकुलनाथ की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
एक्सीडेंटल सासंद हैं नकुलनाथ
छिंदवाड़ा सासंद नकुलनाथ के पिछले 5 सालों के कार्यकाल की बात करें तो अब तक नकुलनाथ द्वारा सिर्फ 4 या 5 दिन छिंदवाड़ा पहुँचे हैं। यानिकी छिंदवाड़ा में जब-जब भी उनका आगमन हुआ है तो उनके दौरे कार्यक्रम पहले से ही तय रहे हैं। वहीं अगर नकुलनाथ के सासंद बनने पर प्रकाश डाला जाए तो कहा जाता है कि वह एक्सीडेंटल सासंद बने हैं। दरअसल 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे, ऐसे में छिंदवाड़ा गढ़ बचाने के लिए उन्होंने अपने पुत्र नकुलनाथ को मैदान में उतारा था, ऐसे में कमलनाथ के मुख्यमंत्री रहते हुए नकुलनाथ ने 37 हजार मतों से जीत दर्ज की थी। हालांकि इस दौरान भी कांग्रेस कार्यकर्ताओ के बीच से किसी नेता को नही चुन पाई थी।
पूर्व कैबिनेट मंत्री ने भी कांग्रेस से दिया इस्तीफा
छिंदवाड़ा में सासंद नकुलनाथ को गुरुवार को बड़ा झटका लगा है। 10 साल तक लगातार कैबिनेट मंत्री की कमान संभालने वाले दीपक सक्सेना ने भी कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। दीपक सक्सेना वहीं नेता हैं जो एक दिन के लिए प्रोटेम स्पीकर भी बनाए गए थे। विगत 35 सालों से कांग्रेस का दामन थामकर कमलनाथ के कदम से कदम मिलाकर चलने वाले दीपक सक्सेना का अचानक कांग्रेस से इस्तीफा देना एक बड़े राजनीतिक फेरबदल की ओर इशारा कर रहा है। हालाकि गुरुवार को दीपक सक्सेना के पुत्र अजय सक्सेना (चुनमुन) भी 50 गाड़ियों के काफिले के साथ भोपाल ले लिए रवाना हो गए हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
लीडरशिप में फिसड्डी निकले नकुलनाथ
छिंदवाड़ा सासंद नकुलनाथ ने अपने 5 साल के कार्यकाल में कांग्रेस के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में अपनी छवि नही बना पाए। कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए कई नेताओं का कहना है कि लगातार उनकी उपेक्षा की गई है। निगम में बैठे सभापति भी यही कह रहे हैं कि सासंद नकुलनाथ द्वारा कभी भी कोई ऐसा प्रयास नही किया गया जिससे कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ सके।