यूक्रेन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह मास्को की उस मांग का पालन नहीं करेगा जिसमें रूसी हमलों को रोकने के लिए कहा गया था। यह मांग इस आशय से की गई थी ताकि रूसी नेता व्लादिमीर पुutin शनिवार को रेड स्क्वायर में भव्य परेड आयोजित कर सकें। यूक्रेन ने इस कदम को एक राजनीतिक चाल के रूप में देखा है और रूस की इस मांग की सख्त आलोचना की है।
यूक्रेन ने कहा कि रूस के हमले पूर्व निर्धारित हैं और यह कि किसी भी युद्धविराम का उद्देश्य केवल उस परेड को सफलतापूर्वक आयोजित करना है, न कि वास्तविक संघर्ष को समाप्त करना। यूक्रेन के अधिकारियों का कहना है कि रूस का यह आग्रह केवल एक दिखावा है, जिससे वे अपने आक्रामक अभियानों को रोकना नहीं चाहते बल्कि अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचना चाहते हैं।
रूस-यूक्रेन संघर्ष कई महीनों से जारी है और दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। रूस का यह प्रस्ताव कि वे पारंपरिक परेड के लिए कुछ घंटों के लिए संघर्ष को बंद कर देंगे, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में विवादस्पद रहा है। कई देशों और विश्लेषकों ने इसे युद्ध के वास्तविक समाधान के बजाय एक प्रदर्शन समझा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परेड रूस के लिए एक अवसर है अपनी सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय एकता को प्रदर्शित करने का। वहीं, यूक्रेन के लिए यह एक चुनौती है कि वह ऐसे समय में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करे जब उसके खिलाफ हमले तेज हुए हैं।
यूक्रेन ने व्लादिमीर पुutin की इस रणनीति को नकारते हुए कहा कि वे किसी भी स्थित में अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करेंगे। यूक्रेन के अधिकारियों ने भी यह स्पष्ट किया है कि वे संघर्ष विराम के लिए इस तरह के अधूरे प्रस्तावों से प्रभावित नहीं होंगे और अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे।
इस टकराव के बीच, मानवाधिकार संगठन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्ध विराम की अपील कर रहे हैं, ताकि निर्दोष नागरिकों को इस संघर्ष के दुष्प्रभावों से राहत मिल सके। हालांकि, राजनीतिक और सैन्य हित इस क्षेत्र को और भी जटिल बनाते जा रहे हैं।
संक्षेप में कहा जाए तो, यूक्रेन ने मास्को की उस मांग को ठुकरा दिया है जिसमें लड़ाई रोकने को कहा गया था ताकि रूसी नेतृत्व लाल चौक पर अपना भव्य कार्यक्रम आयोजित कर सके। इस से स्पष्ट होता है कि संघर्ष फिलहाल कम होने का नाम नहीं ले रहा और दोनों पक्षों में जारी तनातनी अब भी चरम पर है। दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष युद्ध अभी भी जारी है, और किसी स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नजर नहीं आ रहा है।

