Betul News : दसवीं क्लास के छात्र ने राधा-कृष्ण स्वरूप में बनाई अद्भुत गणेश प्रतिमा

भक्ति उम्र की मोहताज नहीं होती, इस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं बैतूल के दसवीं क्लास के छात्र मयंक श्रीराम देशमुख। महज 10 साल की उम्र से गणेश प्रतिमा बनाने की शुरुआत करने वाले मयंक अब तक लगातार पांच वर्षों से इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं गढ़ रहे हैं। इस बार उन्होंने भगवान गणेश को राधा-कृष्ण स्वरूप में ढालकर कला और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है।

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Highlights
  • 10 साल की उम्र से इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं गढ़ रहे मयंक, कला और भक्ति का अनोखा संगम

    बैतूल, राष्ट्रबाण। बैतूल शहर के शंकर नगर स्थित श्री माता मंदिर के सामने रहने वाले दसवीं क्लास के छात्र मयंक श्रीराम देशमुख इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। वजह है उनका अनोखा प्रयास, जिसके तहत उन्होंने भगवान गणेश की प्रतिमा को राधा-कृष्ण स्वरूप में गढ़ा है। मयंक की यह प्रतिमा न केवल देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर रही है, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है।

    बचपन से जुड़ा गणेश भक्ति से रिश्ता

    मयंक ने महज 10 साल की उम्र में गणेश प्रतिमाएं बनाना शुरू कर दिया था। तब उन्होंने मिट्टी से पहली इको-फ्रेंडली प्रतिमा बनाई थी। इसके बाद हर साल गणेश चतुर्थी पर वे अपनी बनाई हुई प्रतिमा की स्थापना करते हैं। खास बात यह है कि हर बार प्रतिमा का स्वरूप अलग होता है। कभी गणेशजी को शास्त्रीय नृत्य की मुद्रा में, कभी योद्धा के रूप में तो कभी भगवान श्रीराम के आशीर्वाद लेते हुए रूप में गढ़ा गया। इस बार राधा-कृष्ण स्वरूप में गणेश प्रतिमा बनाकर उन्होंने कला को एक नई दिशा दी है।

    परिवार और समाज का सहयोग

    मयंक के इस प्रयास में उनके परिवार का भरपूर सहयोग मिलता है। माता-पिता और अन्य परिजन प्रतिमा निर्माण के दौरान उनका उत्साहवर्धन करते हैं। प्रतिमा की स्थापना पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ की जाती है। रोजाना पूजन और आरती का आयोजन होता है, जिसमें मोहल्ले के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। इससे समाज में आपसी एकजुटता और धार्मिक वातावरण भी मजबूत होता है।

    इको-फ्रेंडली संदेश

    मयंक हर बार प्रतिमा बनाने में केवल प्राकृतिक और मिट्टी जैसे पर्यावरण अनुकूल साधनों का ही उपयोग करते हैं। वे प्लास्टर ऑफ पेरिस और केमिकल रंगों से दूर रहते हैं। उनका मानना है कि भगवान की भक्ति में प्रकृति को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं। यही कारण है कि उनकी बनाई प्रतिमाएं न केवल खूबसूरत होती हैं बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती हैं।

    मोहल्ले में आकर्षण का केंद्र

    मयंक की बनाई प्रतिमाएं हर साल मोहल्ले में आकर्षण का केंद्र बनती हैं। बच्चे, बुजुर्ग और युवा—सभी उनके घर पहुंचकर प्रतिमा का दर्शन करते हैं। इस बार राधा-कृष्ण रूपी गणेश प्रतिमा ने लोगों के बीच उत्सव का माहौल और भी खास बना दिया है। लोगों का कहना है कि इतनी कम उम्र में मयंक का यह प्रयास प्रेरणादायक है।

    कला और भक्ति का संगम

    मयंक श्रीराम देशमुख का यह कार्य केवल एक धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है। यह भक्ति और कला का अद्भुत संगम है। जहां एक ओर वे भगवान गणेश की प्रतिमाओं में नई-नई झलक दिखाते हैं, वहीं दूसरी ओर समाज को सकारात्मक संदेश देते हैं। यही वजह है कि आज मयंक न केवल अपने मोहल्ले, बल्कि पूरे बैतूल जिले के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

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