जयपुर। आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है जहां राघव चड्ढा सहित सात सांसदों ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। इस घटनाक्रम ने राजनीति में हलचल मचा दी है और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने भाजपा पर तीखे आरोप लगाए हैं।
गहलोत ने भाजपा को देश की राजनीति में सुधार के मार्ग से दूर बताते हुए कहा कि भाजपा कभी सुधर नहीं सकती। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों में भाजपा ने बार-बार राजनीतिक रंगदारी और षड्यंत्रों से राज्य सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश की है। इसके उदाहरण देते हुए गहलोत ने अपने कार्यकाल की वह घटना भी याद दिलाई जब उनकी सरकार को लगभग एक महीने तक होटल में रहना पड़ा था।
उन्होंने बताया कि उस समय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा उनकी सरकार को गिराने के लिए हॉर्स ट्रेडिंग जैसी गैरकानूनी गतिविधियां की गई थीं। खासकर अमित शाह के नाम पर आरोप लगते रहे कि वे विधायकों को कथित रूप से खरीदने की कोशिश कर रहे थे। इसके साथ ही सचिन पायलट और कुछ विधायक मानेसर चले जाने से राजनीतिक संकट और बढ़ गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा ने ‘आप’ पार्टी के नेताओं और सांसदों पर भी दबाव और उत्पीड़न बढ़ाया है। राघव चड्ढा के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा अनेक सम्मिलित कार्रवाई की खबरों का हवाला देते हुए गहलोत ने कहा कि भाजपा की सरकार में आरोपों पर कार्रवाई ज्यादा राजनीतिक लगती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा की ‘वॉशिंग मशीन’ में नाम आने मात्र से आरोप गायब हो जाते हैं।
वहीं, पश्चिम बंगाल में हुए 91 प्रतिशत से अधिक मतदान को लेकर गहलोत ने सवाल खड़े किए कि इस उच्च मतदान प्रतिशत के पीछे किन सूचनाओं और प्रक्रियाओं का इस्तेमाल हुआ। उन्होंने विधानसभा चुनाव के मतदाता सूची संशोधन और विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर शक जताया। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि वास्तविक स्थिति चुनाव परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
राजस्थान विधानसभा को बम से उड़ाने की मिली धमकी के मामले में भी अशोक गहलोत ने राज्य में कानून व्यवस्था की कमजोरी पर निचोड़ दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के कई प्रतिष्ठित स्थलों को धमकियां मिली हैं, जिनमें हाईकोर्ट और एसएमएस स्टेडियम भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री तक की जान को खतरा पहुंचाने की धमकी मिलना इसे गंभीर बनाता है। गहलोत ने पुलिस की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि तकनीक के इस युग में भी धमकियों के幕后 साजिशकर्ताओं का पता नहीं चल पाया है।
इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि आगामी दिनों में राजस्थान और देश की राजनीति का स्वरूप कैसे बदलेगा। राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती हिंसा, उत्पीड़न और आरोप-प्रत्यारोपों से परेशानी स्पष्ट नजर आ रही है। इस वक्त आम जनता की निगाहें राजनीतिक स्थिरता और पारदर्शिता पर टिकी हैं।

