मध्य प्रदेश में दो चरणों में होगी जनगणना, हाईपावर कमेटी गठित, डिजिटल होगी प्रक्रिया

Rahul Maurya

भोपाल, राष्ट्रबाण: मध्य प्रदेश सरकार ने जनगणना 2027 की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इसके लिए मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में एक हाईपावर स्टेट लेवल कमेटी गठित की गई है, जिसमें 6 अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS), 3 प्रमुख सचिव (PS), और 15 अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी जनगणना की निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगी। जनगणना दो चरणों में होगी: पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक मकान सूचीकरण और गणना के लिए, और दूसरा चरण 9 से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या गणना के लिए। संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि होगी। यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र किया जाएगा।

दो चरणों में जनगणना

  • पहला चरण (अप्रैल-सितंबर 2026): 30 दिनों में मकानों और घरों की गणना होगी। इसमें मकान की स्थिति, सुविधाएँ, और परिवार की संपत्तियों का डेटा एकत्र किया जाएगा। यह चरण जनसंख्या गणना के लिए आधार तैयार करेगा।
  • दूसरा चरण (9-28 फरवरी 2027): 20 दिनों में जनसंख्या की गणना होगी, जिसमें जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, और सांस्कृतिक जानकारी, साथ ही पहली बार जातिगत डेटा भी शामिल होगा। बेघर लोगों की गणना 28 फरवरी की रात होगी, और 1-5 मार्च तक संशोधन दौर चलेगा।

डिजिटल प्रक्रिया और प्रशिक्षण

मध्य प्रदेश में जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। प्रगणक मोबाइल ऐप से डेटा एकत्र करेंगे, और जनता को स्व-गणना का विकल्प भी मिलेगा। भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय ने इसके लिए एक वेब पोर्टल (CMMS) विकसित किया है। 31 दिसंबर 2025 तक मास्टर ट्रेनर, फील्ड ट्रेनर, और फील्ड स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाएगा। लगभग 30 लाख प्रगणकों, जिनमें ज्यादातर सरकारी स्कूल शिक्षक होंगे, को प्रशिक्षित किया जाएगा, विशेष रूप से जातिगत गणना के लिए।

कमेटी की जिम्मेदारियाँ

हाईपावर कमेटी में गृह, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नगरीय विकास, सामान्य प्रशासन, वित्त, पंचायत, ग्रामीण विकास, और जनजातीय कार्य विभागों के अधिकारी शामिल हैं। निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय, मध्य प्रदेश, संयोजक होंगे। कमेटी की मुख्य जिम्मेदारियाँ हैं:

  • कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना।
  • प्रशासनिक इकाइयों की सीमाओं को 31 दिसंबर 2025 तक फ्रीज करना। कमेटी का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा।

सामाजिक और नीतिगत महत्व

यह जनगणना 2011 के बाद मध्य प्रदेश की पहली जनगणना होगी, जो कोविड-19 के कारण 2021 में स्थगित हो गई थी। यह डेटा लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन, 33% महिला आरक्षण, और नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होगा। जातिगत गणना, जो 1941 के बाद पहली बार होगी, सामाजिक न्याय और संसाधन वितरण में अहम भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

डिजिटल प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और जागरूकता की कमी के कारण चुनौतीपूर्ण हो सकती है। स्व-गणना पोर्टल केवल NPR अपडेट करने वालों के लिए उपलब्ध होगा, जिसका कुछ राज्यों ने पहले विरोध किया था। फिर भी, यह जनगणना मध्य प्रदेश के विकास, शहरीकरण, और सामाजिक संरचना को समझने में मदद करेगी।

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