पीएम मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात की डेट तय, ट्रंप के टैरिफ वॉर पर हो सकती है वार्ता

Rahul Maurya

नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात की तारीख पक्की हो गई है। दोनों नेता 31 अगस्त को चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में एक अहम कदम मानी जा रही है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशों के बीच। यह पीएम मोदी का सात साल बाद चीन का पहला दौरा होगा।

SCO समिट में होगी अहम चर्चा

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का यह समिट 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में आयोजित होगा। इस समिट में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और कई अन्य वैश्विक नेता भी शामिल होंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है और इस मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा करता है। इस बार समिट में आतंकवाद, क्षेत्रीय स्थिरता और व्यापार जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। पीएम मोदी की यह यात्रा भारत के लिए SCO में अपनी सक्रिय भूमिका को और मजबूत करने का अवसर होगी।

भारत-चीन संबंधों में सुधार

पिछले साल अक्टूबर में रूस के कजान में ब्रिक्स समिट के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में प्रगति हुई है। इस दौरान सीमा पर तनाव को कम करने के लिए एक समझौता हुआ था, जिसके बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीएम मोदी ने इस मुलाकात में सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया था। तियानजिन में होने वाली इस बैठक में भी सीमा विवाद के समाधान और द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने पर चर्चा होने की उम्मीद है।

वैश्विक मंच पर भारत की रणनीति

SCO समिट में भारत की प्राथमिकताओं में व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सुरक्षा शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने बताया कि भारत आतंकवाद, खासकर सीमा पार आतंकवाद, की कड़ी निंदा करने पर जोर देगा। यह मुद्दा भारत के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद। इसके अलावा, भारत और चीन के बीच व्यापार, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने पर भी बात हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात वैश्विक भूराजनीति में भारत की संतुलित भूमिका को और मजबूत करेगी।

मोदी और शी जिनपिंग की यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों के लिए एक नया अध्याय शुरू कर सकती है। दोनों देशों के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंध न केवल क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इस समिट के दौरान होने वाली चर्चाएँ और समझौते भारत की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति को और सशक्त बना सकते हैं।

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की तियानजिन में होने वाली मुलाकात भारत-चीन संबंधों में एक नया मोड़ ला सकती है। SCO समिट के मंच पर यह बैठक न केवल द्विपक्षीय मुद्दों, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी अहम होगी।

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