मध्‍य प्रदेश में नागरिकों के लिए सुगम परिवहन सेवा योजना शीघ्र प्रारंभ करने की माँग: मोहन यादव

Rashtrabaan

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि प्रदेश में नागरिकों को बेहतर और सुगम लोक परिवहन सेवा प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना को जल्द से जल्द प्रारंभ किया जाए। उन्होंने इस योजना को प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सुरक्षित और सुलभ परिवहन हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा सचिवालय का गठन भी किया जा रहा है, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार और दुर्घटना कम करने के लिए समन्वित प्रयास किए जा सकेंगे। इसके साथ ही, परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी बैठक में उपस्थित रहे और उन्होंने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सहयोग का आश्वासन दिया।

    मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की सीमा पर आने वाले मालवाहक वाहनों की जांच के लिए परिवहन चौकियों और टोल नाकों को आधुनिक और सुविधाजनक बनाया जाएगा तथा इन्हें एकीकृत करने के प्रयास तेज़ किए जाएँगे ताकि जांच प्रक्रिया तीव्र और पारदर्शी हो। उन्होंने राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और विभाग में मानव संसाधन की कमी पूरी करने के लिए अभियान चलाने पर भी जोर दिया।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश के दुर्घटना प्रभावित क्षेत्रों की मैपिंग कराने के निर्देश दिए ताकि मेडिकल और एम्बुलेंस सेवाएँ तेज़ी से प्रदान की जा सकें। उन्होंने सभी संबंधित विभागों की एम्बुलेंस सेवाओं को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर लाने पर बल दिया, जिससे सबसे निकटतम वाहन दुर्घटना स्थल पर 30 मिनट के भीतर पहुंच सके।

    परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बैठक में बताया कि पीएम-राहत एवं राहवीर योजनाओं का मध्य प्रदेश देश में अग्रणी है। पीएम-राहत योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में जिला नोडल अधिकारियों का चयन हो चुका है और लगभग 75% प्रकरण मंजूर हो गए हैं। वहीं, राहवीर योजना के तहत भी कई आवेदन स्वीकृत हुए हैं। उन्होंने बालाघाट जिले में योजना के सफल कार्यान्वयन की तारीफ़ भी की।

    बैठक में यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने दोनों योजनाओं के प्रचार-प्रसार और प्रभावी क्रियान्वयन की राज्य सरकार की पहल की प्रशंसा की है। इसी अनुशंसा पर प्रदेश में ‘म.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय’ का गठन किया जा रहा है।

    वित्तीय वर्ष 2025-26 में परिवहन विभाग ने 4,400 करोड़ के लक्ष्य को पार करते हुए 4,911.78 करोड़ रुपए राजस्व अर्जित किया है, जो कि लगभग 111.6% से अधिक है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 5,721 करोड़ रुपए के राजस्व लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। विभाग ने 51 प्रकार की फेसलेस सेवाओं को लागू कर बिचौलियों से मुक्ति और पारदर्शी सेवा उपलब्ध कराई है। सीएम ने इन उपलब्धियों के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी।

    मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क विस्तार, महिला सुरक्षा, और नागरिकों को संस्थागत लोक परिवहन सुविधा प्रदान करने हेतु मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना की समीक्षा की और जल्दी से जल्दी इसके फील्ड में शुभारंभ पर विशेष जोर दिया।

    परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि योजना को लागू करने के लिए प्रक्रिया तेज़ी से जारी है। यह योजना दो चरणों में लागू होगी और प्रदेश के सात क्षेत्रों इंदौर, उज्जैन, भोपाल (नर्मदापुरम सहित), जबलपुर, सागर, ग्वालियर (चंबल सहित) और रीवा (शहडोल सहित) में कार्यान्वित की जाएगी। पहले चरण के तहत उपनगरीय क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय मुख्यालयों से विस्तारित मार्गों की अनुमति अधिसूचित कर दी गई है।

    पहले चरण में कुल 1,164 मार्गों पर करीब 5,206 बसों का संचालन अगले दो वर्षों में किया जाएगा। प्रत्येक क्षेत्र में बसों की संख्या इस प्रकार होगी: इंदौर में 608 बसें, उज्जैन में 371, भोपाल में 398, जबलपुर में 309, सागर में 344, ग्वालियर में 298 और रीवा में 184 बसें चलाई जाएंगी। इन सभी बसों का रंग समान रखा जाएगा ताकि एकरूपता बनी रहे। साथ ही, एक दक्ष और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से संचालन की मॉनिटरिंग की जाएगी।

    यह योजना प्रदेश के नागरिकों को आरामदायक, सस्ती और सुरक्षित यात्रा सुविधा प्रदान कर सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सुगम परिवहन सेवा योजना जल्द ही धरातल पर उतरेंगे और यात्रियों को एक नया अनुभव मिलेगा।

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