बरघाट की जनता ने विधायक चुना या पदम् सनोड़िया का चौकीदार? जनता के सवालों से घिरे कमल मर्स्कोले

Rashtrabaan

सिवनी, राष्ट्रबाण। कहते हैं राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता। नेता चुनाव के समय जनता जनार्दन के दरवाजे पर जाकर हाथ जोड़ते हैं, शीश झुकाकर प्रणाम करते हैं और हर वादा करते हैं। लेकिन चुनाव जीतते ही जनता के बहुमूल्य वोट और उनकी उम्मीदें भूल जाते हैं। उन्हें याद रह जाते हैं तो केवल अपने फायदे के चेहरे और अपने निजी स्वार्थ। यही स्थिति आज बरघाट विधानसभा के विधायक कमल मर्स्कोले पर पूरी तरह लागू होती नजर आ रही है।

जिस जनता ने अपने अमूल्य वोट देकर उन्हें विधानसभा भेजा, उसी जनता की समस्याओं के समाधान की जगह वे अपने राजनीतिक समीकरण और खास दोस्तों के हित साधने में ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं। चुनाव के समय क्षेत्र के विकास, बेहतर सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था का जो सपना जनता को दिखाया गया था, वह अब अधूरा ही रह गया है।

सड़क और स्वास्थ्य बदहाल

बरघाट क्षेत्र की सड़कें आज भी गड्ढों और कीचड़ से भरी पड़ी हैं। बरसात में हालात और खराब हो जाते हैं, लोगो का पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता हैं। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चरमराई हुई है। उप स्वास्थ्य केंद्रों में अफसर और कर्मचारी मनमानी करते हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भी मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है। लेकिन विधायक महोदय को इन समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कभी शासकीय अस्पतालों की हालत जानने की कोशिश तक नहीं की।

शिक्षा भी पिछड़ रही

बरघाट क्षेत्र के स्कूलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। संसाधनों की कमी, शिक्षकों की अनुपलब्धता और अव्यवस्था के कारण ग्रामीण अंचलों के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। जिन मुद्दों पर जनता ने भरोसा कर वोट दिए थे, वे सभी अधूरे साबित हो रहे हैं।

विधायक की चिंता – जनता नहीं, मित्र का होटल कारोबार

आम जनता की समस्याओं से बेखबर विधायक कमल मर्स्कोले अपने खास कांग्रेसी मित्र पदम् सनोड़िया के होटल कारोबार को लेकर काफी सक्रिय बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सिवनी नगरीय सीमा से लगी एक होटल पदम् सनोड़िया की है। शहर की कई होटलों में बाहरी राज्यों और जिलों की संदिग्ध गतिविधियां लगातार चर्चा का विषय बनी रहती हैं। अनैतिक कार्यों पर अंकुश लगाने के लिए जब सिवनी पुलिस ऐसी होटलों पर कार्रवाई करती है, तो आरोप है कि विधायक मर्स्कोले पुलिस पर दबाव डालकर कार्रवाई रोकवाने का प्रयास करते हैं।

पूर्व में होटल कनिष्क पर हुई कार्रवाई के दौरान कई जोड़े पकड़े गए थे। उस समय भी पदम् सनोड़िया ने अपने विधायक मित्र से फोन लगवाकर पुलिस कार्रवाई रुकवाने की कोशिश की थी। कहा जाता है कि विधायक महोदय ने मित्रता निभाने के लिए पुलिस अधिकारियों को फोन तक घुमाए और कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

उम्मीदें और सवाल

अब सवाल यह उठता है कि क्या बरघाट की जनता ने कमल मर्स्कोले को अपना कीमती वोट देकर विधानसभा इसीलिए भेजा था कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने और विकास कार्य करवाने की बजाय केवल अपने मित्र पदम् सनोड़िया के कथित होटल कारोबार के चौकीदार बनकर रह गए है? जनता के बीच यह चर्चा अब आम हो चुकी है कि विधायक की कार्यप्रणाली विकास की बजाय केवल अपने राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है। क्षेत्र की टूटी सड़कें, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं और अव्यवस्थित शिक्षा प्रणाली यही साबित करती हैं कि विधायक जनता के सरोकारों से पूरी तरह कट चुके हैं।

बरघाट की जनता ने कमल मर्स्कोले को विधानसभा भेजकर जिन उम्मीदों को संजोया था, वे उम्मीदें अब निराशा में बदल रही हैं। क्षेत्र की समस्याओं की अनदेखी और मित्र पदम् सनोड़िया के कारोबार में उनकी कथित दिलचस्पी को देखकर आम लोग कहने लगे हैं कि विधायक जनता का प्रतिनिधि कम और पदम् सनोड़िया का चौकीदार ज्यादा नजर आते हैं।

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