भोपाल, राष्ट्रबानण: मध्य प्रदेश कांग्रेस में नया विवाद छिड़ गया है, जिसमें दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमल नाथ 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के लिए एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। इस बगावत ने कमल नाथ की 15 महीने पुरानी सरकार को गिरा दिया था। दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ ने सिंधिया की ‘विश लिस्ट’ को अनसुना कर दिया, जबकि कमल नाथ ने कहा कि दिग्विजय की दखलंदाजी के कारण सिंधिया नाराज हुए और सरकार गिरी। यह तकरार मध्य प्रदेश में कांग्रेस की एकता और भविष्य की रणनीति पर सवाल उठा रही है।
दिग्विजय का आरोप: कमल नाथ ने नहीं मानी माँगें
दिग्विजय सिंह ने एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार में खुलासा किया कि 2020 में कमल नाथ और सिंधिया के बीच मतभेद के कारण सरकार गिरी। उन्होंने बताया कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र, जो सिंधिया का गढ़ है, से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए एक उद्योगपति के घर डिनर मीटिंग हुई थी। इस बैठक में दिग्विजय और सिंधिया ने कमल नाथ को एक ‘संयुक्त विश लिस्ट’ सौंपी, लेकिन नाथ ने उसका पालन नहीं किया। दिग्विजय ने कहा, “मैंने चेतावनी दी थी कि दोनों की लड़ाई से सरकार गिर सकती है, लेकिन तय मुद्दों पर अमल नहीं हुआ।” उन्होंने यह भी कहा कि यह वैचारिक टकराव नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का टकराव था।
कमल नाथ का पलटवार
कमल नाथ ने X पर जवाब देते हुए कहा कि पुरानी बातें उखाड़ने का कोई मतलब नहीं, लेकिन यह सच है कि सिंधिया को लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। उन्होंने लिखा, “सिंधिया की निजी महत्वाकांक्षा और इस नाराजगी ने उन्हें 22 विधायकों (6 मंत्रियों सहित) के साथ बीजेपी में जाने के लिए प्रेरित किया।” कमल नाथ ने दिग्विजय की दखलंदाजी को सरकार गिरने का कारण बताया।
सिंधिया की चुप्पी और BJP का तंज
ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो अब केंद्रीय मंत्री हैं, ने इस विवाद पर चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा, “मैं अतीत पर टिप्पणी नहीं करूँगा।” BJP ने इस तकरार का फायदा उठाते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। BJP प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि कमल नाथ ने स्वीकार किया कि दिग्विजय सरकार चला रहे थे, जिससे BJP की संलिप्तता के आरोप गलत साबित होते हैं। BJP मंत्री विश्वास सारंग ने भी कमल नाथ से पूछा कि सरकार के पीछे से कौन चला रहा था।
दिग्विजय-सिंधिया का रिश्ता
हाल ही में एक स्कूल उद्घाटन समारोह में दिग्विजय और सिंधिया की मुलाकात चर्चा में रही। सिंधिया ने दिग्विजय को मंच पर बुलाया, जिसे दिग्विजय ने हल्के में लिया। दिग्विजय ने बताया कि उन्होंने सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया को कांग्रेस में लाया था और 2001 में उनकी मृत्यु के बाद ज्योतिरादित्य की मदद की थी।
कांग्रेस में डैमेज कंट्रोल
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विवाद को कम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “दिग्विजय और कमल नाथ के बीच गहरा स्नेह है। उनकी अपनी केमिस्ट्री है, और वे मुद्दों को चर्चा में लाना जानते हैं।” हालाँकि, यह विवाद कांग्रेस की एकता को कमजोर कर सकता है, खासकर जब पार्टी ग्वालियर-चंबल और महाकौशल में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
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