भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीद प्रक्रिया को जल्द शुरू करने का आग्रह किया है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में उत्पन्न हो रहे संकट को दूर करने के लिए इस कदम को आवश्यक बताया है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस वर्ष मूंग की बुवाई लगभग 15-20 प्रतिशत बढ़ी है, जिससे किसानों की उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि मौजूदा बाजार की स्थितियां किसानों के लिए लाभकारी नहीं लग रही हैं और इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में ग्रीष्मकालीन मूंग फसल पूरी तरह पक चुकी है और जल्द ही मंडियों में उत्पाद की भारी आवक होने वाली है। ऐसे में यदि सरकार ने समय रहते खरीद शुरू नहीं की, तो किसानों को अपनी फसल उचित मूल्य पर बेचने में कठिनाई होगी।
उन्होंने कहा, “सरकार का तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है अन्यथा किसानों को अपनी मेहनत की उपज उत्पादन लागत से कम कीमत पर बेचनी पड़ेगी, जो उनके लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक होगा।”
दिग्विजय सिंह ने राज्य कृषि सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य केदार सिरोही की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासन की सक्रियता में कमी चिंताजनक है। उन्होंने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक केंद्र को अपने वार्षिक खरीद प्रस्ताव नहीं भेजा है, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत सहायता पाने के लिए आवश्यक है।
पत्र में उन्होंने जोर देकर कहा है कि हजारों किसानों की आजीविका इस खरीद प्रक्रिया की समय पर शुरुआत पर निर्भर करती है। राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है, ताकि किसानों को उनका हक मिल सके और वे आर्थिक संकट से बच सकें।
दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से यह भी आग्रह किया कि वे शीघ्र आवश्यक अनुमतियां जारी करें ताकि मूंग की खरीद व्यवस्थित रूप से प्रारंभ हो सके और राज्य के किसान उचित लाभ प्राप्त कर सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह प्रक्रिया अभी नहीं हुई, तो यह सीधे ग्रामीण क्षेत्रों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।
इस प्रकार, दिग्विजय सिंह की मांग एक गंभीर चिंता को दर्शाती है जो मध्य प्रदेश के कृषि क्षेत्र से जुड़ी है, खासकर उन किसानों के लिए जो ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल पर निर्भर हैं। समय पर खरीद शुरू करने से न केवल किसानों का आर्थिक नुकसान रोका जा सकता है, बल्कि राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था भी मजबूती प्राप्त करेगी।

