मुंबई। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. नाडकर्णी का इस दुनिया से जाना एक सच्चे बहुआयामी प्रतिभा के क्षरण के समान है, जिन्होंने मनोचिकित्सा के साथ-साथ साहित्य, कला, संगीत और समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में अपना अमूल्य योगदान दिया।
एकनाथ शिंदे ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, “डॉ. आनंद नाडकर्णी के निधन की खबर अत्यंत दुःखद और चौंकाने वाली है। वे ठाणे के गौरव और सशक्त स्तंभ थे। उनके जीवन का प्रत्येक पहलू हमें प्रेरणा देता है।”
शिंदे ने बताया कि डॉ. नाडकर्णी ने लगभग साढ़े तीन दशकों से मनोचिकित्सा के क्षेत्र में मेहनत और समर्पण से काम किया। उन्होंने ‘इंस्टीट्यूट फॉर साइकोलॉजी’ की स्थापना कर हजारों लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा अपनाया गया “सभी के लिए एक स्वस्थ मन” का आदर्श सामाजिक चेतना को जगाने वाला था।
उन्हें सामाजिक कार्यों के प्रति गहरा लगाव था, जो उन्होंने दिवंगत डॉ. सुनंदा अवचट के सहयोग से पुणे में नशामुक्ति केंद्र ‘मुक्तांगन’ के गठन में दिखाया। इस केंद्र ने अनेक नशामुक्ति की कठिन राह पर चलने वालों को नई उम्मीद दी। ये दोनों संस्थाएं समाज सेवा के लिए अनुकरणीय उदाहरण प्रदान करती हैं।
सिर्फ मनोचिकित्सक ही नहीं, डॉ. नाडकर्णी साहित्य और कला में भी निपुण थे। उनके लेखन में ‘गड्डे पंचविशी’, ‘वैद्यक सत्ता’, ‘शहाण्यांचा साइकियाट्रिस्ट’, ‘मन मैत्रीच्या प्रदेशात’ जैसी दर्जनों किताबें शामिल हैं, जिनसे पाठक गहराई से प्रभावित हुए। रंगमंच पर भी उनका योगदान विशेष था। ‘जन्म रहस्य’, ‘त्या तिघांची गोष्ट’ और ‘रंग माझा वेगळा’ जैसे नाटकों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
एकनाथ शिंदे ने कहा, “डॉ. नाडकर्णी के जाने से साहित्य, मनोविज्ञान, कला, संगीत, और समाजसेवा में एक अपूरणीय क्षति हुई है। वे एक ऐसे बहुआयामी व्यक्तित्व थे जो अनेक विधाओं में उत्कृष्टता हासिल कर समाज के लिए आदर्श थे। उनकी कमी हमेशा महसूस की जाएगी। मैं उन्हें अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”
डॉ. आनंद नाडकर्णी का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेगा। उनकी यादें और योगदान सदैव जीवित रहेंगे, और वे उन लोगों के दिलों में रहेंगे जिन्हें उन्होंने मदद, मार्गदर्शन और शिक्षा दी।

