नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए नए टैरिफ को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ये टैरिफ भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बन सकते हैं। इंडिया टुडे को दिए एक विशेष साक्षात्कार में राजन ने भारत को अपनी व्यापार नीतियों पर फिर से विचार करने की सलाह दी। उनका मानना है कि वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता के इस दौर में भारत को अपनी रणनीति को और मजबूत करना होगा।
टैरिफ का असर और भारत की स्थिति
अमेरिका ने हाल ही में भारतीय सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लागू किया है, साथ ही रूस से तेल आयात करने के लिए अतिरिक्त 25 फीसदी शुल्क की घोषणा की है। राजन ने इसे भारत के लिए “चिंताजनक” बताया और कहा कि ये कदम भारत के निर्यात क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं। खास तौर पर, स्टील, ऑटोमोबाइल, और टेक्सटाइल जैसे उद्योगों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत ने समय रहते वैकल्पिक बाजारों की तलाश नहीं की, तो व्यापार घाटा बढ़ सकता है। राजन ने सुझाव दिया कि भारत को यूरोप, अफ्रीका, और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में अपने व्यापार को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
आर्थिक रणनीति में बदलाव की जरूरत
रघुराम राजन ने जोर देकर कहा कि भारत को किसी एक देश पर व्यापार के लिए ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सरकार से घरेलू सुधारों पर ध्यान देने की अपील की, जैसे कि व्यापार में आसानी बढ़ाना, बुनियादी ढांचे में निवेश, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी को मजबूत करना। इसके अलावा, उन्होंने छोटे और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत कदम उठाने की सलाह दी। राजन का कहना है कि भारत की आर्थिक नीतियों में लचीलापन लाना जरूरी है, ताकि वैश्विक बदलावों का सामना किया जा सके।
विशेषज्ञों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताओं में भारत को सावधानी बरतनी होगी। रघुराम राजन ने रूस से तेल आयात की नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि भारत को अपनी ऊर्जा नीति में विविधता लानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निवेश बढ़ाना चाहिए, ताकि विदेशी तेल पर निर्भरता कम हो। इसके साथ ही, उन्होंने कॉर्पोरेट टैक्स में सुधार और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नीतियों को और पारदर्शी बनाने की बात कही।
भारत के सामने चुनौतियाँ
रघुराम राजन ने चेतावनी दी कि अगर भारत ने इन टैरिफ्स का जवाब तुरंत नहीं दिया, तो वैश्विक मंदी का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना होगा, ताकि वे वैश्विक बाजार में टिक सकें। साथ ही, उन्होंने सरकार से अपील की कि वह किसानों और छोटे उद्यमियों को सहायता प्रदान करे, जो इन टैरिफ्स से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।