80 किलोमीटर दूर धान बेचने कैसे पहुँचे किसान! प्रेमलता, सुनील, अनिल और पुरषोत्तम की चांडाल चौकड़ी में फंसे किसान?

सिवनी जिले में धान खरीदी को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने शासन की किसान हितैषी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। सवाल यह नहीं है कि धान खरीदी हुई या नहीं, सवाल यह है कि आखिर ग्राम कोहका के किसान 80 किलोमीटर दूर धान बेचने कैसे पहुँच गए? इस सवाल के पीछे कथित तौर पर एक संगठित फर्जीवाड़ा छिपा है, जिसमें भाजपा नेता अनिल गोल्हानी के संरक्षण में समृद्धि अन्न भंडार, कबीरा स्वसहायता समूह और गल्ला व्यापारियों की मिलीभगत से लाखों रुपये का खेल खेले जाने का आरोप लगाया जा रहा है।

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  • सिवनी में धान खरीदी में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप, भाजपा नेता के संरक्षण में बिचौलियों का खेल

    सिवनी, राष्ट्रबाण। मध्यप्रदेश में सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से शासकीय धान खरीदी केंद्रों की शुरुआत की गई थी। लेकिन सिवनी जिले से सामने आए ताजा आरोप इस पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। ग्राम कोहका के किसानों के नाम पर कथित तौर पर ऐसा फर्जीवाड़ा किया गया है, जिसने न सिर्फ किसानों के हक पर डाका डाला, बल्कि सरकारी खरीदी व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।

    सूत्रों के मुताबिक, सिवनी जिले के समृद्धि अन्न भंडार में कबीरा स्वसहायता समूह की अध्यक्ष प्रेमलता और उसके गल्ला व्यापारी रिश्तेदार सुनील सनोड़िया ने अन्य व्यापारियों के साथ सांठगांठ कर बड़ी मात्रा में धान की खरीदी की। आरोप है कि यह पूरा खेल भाजपा नेता अनिल गोल्हानी के संरक्षण में चल रहा था, जिससे बिचौलियों के हौसले और बुलंद हो गए। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ग्राम कोहका के किसान आखिर 80 किलोमीटर दूर धान बेचने कैसे पहुँचे? किसानों का कहना है कि उन्होंने न तो इतनी दूरी तय कर धान बेचा और न ही उन्हें शासकीय समर्थन मूल्य मिला। उन्होंने अपनी धान व्यापारी को बेचा लेकिन व्यापारी ने उनका पंजीयन लेकर यह धान समृद्धि अन्न भंडार में कबीरा स्वसहायता समूह को बेचा है। यह मामला साफ तौर पर किसानों के पंजीयन का दुरुपयोग है।

    सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि गल्ला व्यापारी पुरुषोत्तम सनोड़िया ने किसानों के पंजीयन का इस्तेमाल कर बड़ी मात्रा में धान शासकीय खरीदी केंद्रों में बेचा। इस दौरान किसानों को औने-पौने दाम देकर बिचौलियों ने लाखों रुपये की कमाई की, जबकि कागजों में यह दर्शाया गया कि किसानों को समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिला। साथ ही यह भी आरोप है की समूह ने व्यापारियों की घटिया धान को भी खरीद कर व्यापारी को लाखो का फायदा पहुँचाया और खुद ने भी लाखो रूपये का कमीशन खाया है। इस पूरे फर्जीवाड़े का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि किसानों के नाम और पंजीयन का इस्तेमाल कर शासन की किसान हितैषी योजनाओं में सीधी सेंधमारी की गई। जिन योजनाओं का उद्देश्य किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना था, वही योजनाएं कुछ प्रभावशाली लोगों और बिचौलियों की तिजोरी भरने का जरिया बन गईं।

    स्वसहायता समूह की आड़ में यह पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है। सुनील सनोड़िया, प्रेमलता सनोड़िया और पुरुषोत्तम सनोड़िया जैसे लोग किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनकी उपज सस्ते में खरीदते हैं और फिर सरकारी दरों पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। किसानों को न तो सही दाम मिलता है और न ही उन्हें यह पता चल पाता है कि उनके नाम पर कितना धान बेचा गया। इस मामले में भाजपा नेता अनिल गोल्हानी का नाम सामने आना राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते प्रशासन और संबंधित विभाग आंखें मूंदे बैठे रहे, जिससे यह फर्जीवाड़ा लगातार चलता रहा। हालांकि, अब तक इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    बुद्धिजीवी लोगो का कहना है कि यदि शासन ने धान खरीदी केंद्र गांवों के पास ही बनाए हैं, तो फिर 80 किलोमीटर दूर खरीदी दिखाना अपने आप में संदेह पैदा करता है। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि एक सुनियोजित घोटाले की ओर भी इशारा करता है। अब इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की भूमिका अहम हो गई है। जरुरत है जिला कलेक्टर इस मामले का संज्ञान लें और निष्पक्ष जांच कराएं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी किसान हितैषी योजनाओं के नाम पर किसानों को लूटने की हिम्मत न कर सके। फिलहाल, सिवनी जिले में यह सवाल गूंज रहा है। क्या किसानों के नाम पर हुए इस फर्जीवाड़े पर प्रशासन कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? जवाब अब जिला कलेक्टर और प्रशासनिक तंत्र के हाथ में है।

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