नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ ने देश के कपड़ा उद्योग को गहरी चोट पहुँचाई है। यह टैरिफ, जिसमें 25% आधार शुल्क और रूस से तेल खरीद के लिए 25% जुर्माना शामिल है, बुधवार से लागू हो गया है। इसका सबसे ज्यादा असर कपड़ा क्षेत्र पर पड़ा है, जहाँ तिरुपुर, सूरत, कोयंबटूर, लुधियाना और कानपुर जैसे प्रमुख उत्पादन केंद्रों में कई कारखानों ने उत्पादन रोक दिया है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने इसे “विनाशकारी” बताया, और उद्योग अब सरकारी राहत की प्रतीक्षा कर रहा है। भारत सरकार ने टैरिफ को “अनुचित और अन्यायपूर्ण” करार देते हुए जवाबी रणनीति पर विचार शुरू कर दिया है।
कपड़ा उद्योग पर संकट
2024-25 में भारत ने अमेरिका को $86.5 बिलियन के सामान निर्यात किए, जिसमें कपड़ा और परिधान का हिस्सा $10.3 बिलियन था। 50% टैरिफ ने भारतीय कपड़ों को अमेरिकी बाजार में 30-35% महँगा कर दिया है। तिरुपुर, जो भारत का “निटवेयर कैपिटल” है, में 20,000 इकाइयों में से 2,500 तैयार परिधान निर्यात करती हैं। यहाँ कई exporters ने बताया कि अमेरिकी खरीदारों ने $80,000 तक के ऑर्डर रद्द कर दिए। CITI के अध्यक्ष राकेश मेहरा ने कहा, “हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता खत्म हो रही है। वियतनाम (20% टैरिफ) और बांग्लादेश (20%) जैसे देश अब सस्ते विकल्प हैं।” तिरुपुर में 95% MSME इकाइयाँ हैं, और उद्योग को $3-4 बिलियन के नुकसान का अनुमान है।
प्रभावित शहर और रोजगार
तिरुपुर और कोयंबटूर में 10 लाख से ज्यादा श्रमिक कपड़ा उद्योग पर निर्भर हैं। सूरत में मैन-मेड टेक्सटाइल और डायमंड पॉलिशिंग इकाइयाँ भी प्रभावित हैं। लुधियाना और कानपुर में छोटे कारखानों ने उत्पादन रोका, जिससे लाखों नौकरियाँ खतरे में हैं। एक तिरुपुर exporter ने कहा, “मेरे $80,000 के T-shirt ऑर्डर रद्द हो गए। खरीदार कीमतें नहीं बढ़ा सकते।” बेरोजगारी का खतरा बढ़ रहा है, क्योंकि MSME इकाइयाँ 4-5 महीने से ज्यादा नुकसान सहन नहीं कर सकतीं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि निर्यात में 40-50% की कमी से भारत का GDP 0.2-0.6% घट सकता है।
सरकार और उद्योग की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने टैरिफ को “अनुचित” बताते हुए 21-दिवसीय खिड़की का उपयोग कर बातचीत की योजना बनाई है। 25-29 अगस्त को अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा। CITI ने वित्तीय राहत, कच्चे माल की उपलब्धता, और नीतिगत सुधारों की माँग की है। सरकार ने 19 अगस्त को कपास आयात पर 11% शुल्क हटा दिया, जिसे 30 सितंबर तक बढ़ाया गया, ताकि कच्चे माल की लागत कम हो। उद्योग नए बाजारों (यूके, ईयू) की तलाश में है, लेकिन ये अमेरिका के $10 बिलियन बाजार की भरपाई नहीं कर सकते। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
उद्योग विशेषज्ञ बाजार विविधीकरण और संयुक्त उद्यमों की सलाह दे रहे हैं। PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स ने यूके, ईयू, और TEPA देशों (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे) में निर्यात बढ़ाने का सुझाव दिया। कुछ कंपनियाँ बांग्लादेश और वियतनाम में उत्पादन स्थानांतरित करने पर विचार कर रही हैं। आनंद महिंद्रा जैसे उद्योगपति इसे 1991 जैसे सुधारों का अवसर मानते हैं। हालांकि, अल्पकालिक नुकसान से बचने के लिए तत्काल सरकारी सहायता जरूरी है।
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