भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश के विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़े अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस बैठक में शिक्षा, सिंचाई, सड़क निर्माण और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए। कुल 53 हजार करोड़ रुपये की योजना 2031 तक जारी रखने का फैसला किया गया है, जिससे प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव होगा।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने बैठक के बाद बताया कि शाजापुर जिले के लिए लखुंदर उच्च दाब सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को 155 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना के तहत शाजापुर के 17 गांव और उज्जैन जिले के तराना तहसील के 7 गांवों के किसानों को लाभ मिलेगा, जिससे 9,000 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई होगी और कृषि उत्पादकता में वृद्धि होने की उम्मीद है।
प्रशासन ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में गेहूं की खरीदी 29.31 लाख मीट्रिक टन हो चुकी है और किसानों के खातों में अब तक 2546 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है। खरीदी का कार्य सप्ताह में छह दिन जारी रहेगा और शनिवार को अब अवकाश नहीं रहेगा, जिससे खरीद प्रक्रिया और तेज होगी।
कैबिनेट ने इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी दी मंजूरी
- पिछड़े वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2005 से संचालित दिल्ली के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले प्रदेश के ओबीसी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। स्कॉलरशिप राशि को 1550 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह करने का प्रस्ताव मनzoor किया गया।
- लोक निर्माण विभाग की पुरानी और नई सड़क निर्माण योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक निरंतर संचालित करने की स्वीकृति दी गई है। पुराने कार्यों को त्वरित रूप से पूरा करने के लिए 26,311 करोड़ रुपये और नई योजनाओं के लिए 53,000 करोड़ रुपये की राशि अनुमोदित की गई है।
- राज्य की 38,901 आंगनवाड़ी भवनों में बिजली व्यवस्था स्थापित करने के लिए 80 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है, जिससे बच्चों और कर्मियों के लिए सुविधा बढ़ेगी।
- गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में 134 पीजी सीटों की वृद्धि हेतु 80 करोड़ रुपये के निर्माण कार्यों को मंजूरी मिली है, जिससे चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा।
- श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के विस्तार के लिए 174 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।
- मध्य प्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां और संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक, 2010 को वापस लेने का निर्णय लिया गया है।
- खरीफ 2020 में खरीदी गई धान की मिलिंग से बची 7.73 लाख मीट्रिक टन धान के ई-ऑक्शन के निराकरण पर भी चर्चा की गई और स्वीकृति प्रदान की गई है।
- भारतीय वन सेवा में प्रधान मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक पद के सृजन को मंजूरी दी गई है, जिससे वन संरक्षण कार्यों को मजबूती मिलेगी।
इन निर्णयों से स्पष्ट है कि मोहन सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र में विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों, छात्रों और आमजन के हित के लिए उठाए गए कदम स्वागत योग्य हैं। आने वाले दिनों में इन योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश का समग्र विकास तेजी से संभव होगा।

