नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. ने उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है। गुरुवार को रेड्डी ने संसद भवन में राज्यसभा के सेक्रेटरी जनरल पीसी मोदी को चार सेट में नामांकन पत्र सौंपा। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, NCP (SP) के शरद पवार, और TMC के डेरेक ओ’ब्रायन सहित कई बड़े नेता मौजूद रहे। रेड्डी ने नामांकन से पहले प्रेरणा स्थल पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होगा, जिसमें रेड्डी का मुकाबला NDA के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से है।
रेड्डी का बयान: यह वैचारिक लड़ाई
नामांकन दाखिल करने के बाद रेड्डी ने कहा कि यह चुनाव केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस भारत के विचार का है, जहाँ संसद ईमानदारी से काम करे, असहमति का सम्मान हो, और संस्थाएँ स्वतंत्रता व निष्पक्षता के साथ जनसेवा करें। उन्होंने सभी सांसदों से समर्थन की अपील की। खड़गे ने रेड्डी को “संविधान और सामाजिक न्याय का सच्चा रक्षक” बताया, जो गरीबों और कमजोर वर्गों के लिए लड़ते रहे हैं। उनकी नियुक्ति को विपक्ष ने “वैचारिक लड़ाई” करार दिया, क्योंकि वे मानते हैं कि संवैधानिक मूल्य खतरे में हैं।
रेड्डी का प्रोफाइल
79 वर्षीय बी. सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के एक किसान परिवार से हैं। उन्होंने 1971 में उस्मानिया विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली और आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में वकालत शुरू की। 1995 में वे हाईकोर्ट के जज बने, 2005 में गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, और 2007 में सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त हुए। उन्होंने तेलंगाना में जाति जनगणना के लिए विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व किया और गोवा के पहले लोकायुक्त रहे। उनकी सलवा जुदुम जैसी ऐतिहासिक फैसलों के लिए प्रशंसा होती है।
विपक्ष की रणनीति
विपक्ष ने रेड्डी के चयन को दक्षिण भारत और गैर-राजनीतिक चेहरा चुनने की रणनीति से जोड़ा। DMK की माँग पर दक्षिण भारत से उम्मीदवार और TMC की सलाह पर गैर-राजनीतिक व्यक्तित्व चुना गया। AAP, जो I.N.D.I.A. का हिस्सा नहीं है, ने भी समर्थन की घोषणा की। यह कदम तेलुगु गौरव को बढ़ावा देता है, जिससे TDP, YSRCP, और BRS के लिए रेड्डी का विरोध करना मुश्किल हो सकता है।
चुनावी गणित
उपराष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के 782 सांसद मतदान करेंगे, क्योंकि 5 राज्यसभा और 1 लोकसभा सीट खाली हैं। जीत के लिए 391 वोट (50% से अधिक) चाहिए। NDA की मज़बूत स्थिति के कारण सीपी राधाकृष्णन का जीतना तय माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष इसे संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई के रूप में पेश कर रहा है। नामांकन की अंतिम तारीख 21 अगस्त, जांच 22 अगस्त, और नाम वापसी 25 अगस्त को है।