टोक्यो, राष्ट्रबाण: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नया आयाम दिया है। टोक्यो में 15वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिगेरु इशिबा ने 21 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों में रक्षा, व्यापार, डिजिटल तकनीक, और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने अगले दस वर्षों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन (लगभग 68 अरब डॉलर) के निवेश का लक्ष्य रखा है। यह यात्रा भारत और जापान के बीच गहरे सांस्कृतिक और आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई है।
रक्षा और सुरक्षा में सहयोग
शिखर सम्मेलन में दोनों देशों ने 2008 की सुरक्षा सहयोग संयुक्त घोषणा को अपग्रेड किया। इस नए ढांचे में रक्षा उपकरणों की खरीद और तकनीकी हस्तांतरण पर जोर दिया गया है। दोनों नेताओं ने आतंकवाद और साइबर सुरक्षा जैसे साझा खतरों के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। भारत और जापान ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए संयुक्त सैन्य अभ्यासों को बढ़ाने का फैसला किया, जिसमें धर्म गार्डियन और जिमेक्स जैसे अभ्यास शामिल हैं। यह सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर चीन की बढ़ती आक्रामकता के मद्देनजर।
आर्थिक और तकनीकी साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-जापान आर्थिक फोरम को संबोधित करते हुए जापानी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत की स्थिर अर्थव्यवस्था और तेजी से बढ़ता बाजार जापानी कंपनियों के लिए सुनहरा अवसर है। दोनों देशों ने डिजिटल तकनीक, सेमीकंडक्टर, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए डिजिटल साझेदारी 2.0 पर हस्ताक्षर किए। इसके अलावा, स्वच्छ ऊर्जा के लिए संयुक्त क्रेडिट तंत्र पर समझौता हुआ, जो भारत के 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य को समर्थन देगा।
सांस्कृतिक और मानव संसाधन आदान-प्रदान
दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में पाँच लाख लोगों के आदान-प्रदान का लक्ष्य रखा है, जिसमें 50,000 कुशल भारतीय कामगार जापान में योगदान देंगे। सांस्कृतिक स्तर पर, टोक्यो में भारतीय प्रवासियों और जापानी कलाकारों ने मोदी का पारंपरिक स्वागत किया। शोरिनजान दरुमा-जी मंदिर के मुख्य पुजारी ने उन्हें दरुमा गुड़िया भेंट की, जो जापान में दृढ़ता का प्रतीक है। 2025-26 को भारत-जापान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार आदान-प्रदान वर्ष के रूप में मनाने का फैसला भी लिया गया।
वैश्विक महत्व
यह शिखर सम्मेलन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और जापान की साझा दृष्टि को रेखांकित करता है। दोनों देश क्वाड (भारत, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया) के तहत समुद्री सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मोदी ने जापानी अखबार योमिउरी शिम्बुन को दिए साक्षात्कार में कहा कि भारत-जापान साझेदारी वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है।
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