पुतिन से मुलाकात के बाद जयशंकर का बयान- भारत-रूस संबंध दुनिया के सबसे मजबूत

Rahul Maurya
मॉस्को में जयशंकर-पुतिन मुलाकात (Photo:X/DrSJaishankar)

नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 21 अगस्त को मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की, जहाँ उन्होंने भारत-रूस संबंधों को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे स्थिर वैश्विक रिश्तों में से एक बताया। तीन दिवसीय यात्रा पर मॉस्को पहुँचे जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ भी व्यापक चर्चा की। यह दौरा अमेरिका द्वारा भारत पर 50% टैरिफ (25% रूस से तेल खरीद के लिए दंडात्मक) लगाने की पृष्ठभूमि में हुआ, जिसे ट्रंप प्रशासन ने यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फंडिंग का आरोप लगाकर लागू किया।

भारत-रूस संबंधों की स्थिरता

जयशंकर ने लावरोव के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा, “भारत और रूस के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से प्रमुख वैश्विक रिश्तों में सबसे स्थिर रहे हैं। भू-राजनीतिक सामंजस्य, नेतृत्व स्तर पर संपर्क, और जनता की भावनाएँ इसके मुख्य आधार हैं।” लावरोव ने इसे “विशेष रणनीतिक साझेदारी” करार दिया। भारत में रूस के प्रभारी राजदूत रोमन बाबुश्किन ने भी पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद संबंधों को “उन्नत पथ पर” बताया, जिसमें ऊर्जा और रक्षा सहयोग मुख्य स्तंभ हैं।

व्यापार और आर्थिक सहयोग

भारत-रूस व्यापार 2021 के 13 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 68 अरब डॉलर तक पहुँचा, लेकिन व्यापार घाटा 6.6 अरब से 59 अरब डॉलर हो गया। जयशंकर ने फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ाकर इस असंतुलन को ठीक करने पर जोर दिया। उन्होंने गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने, इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर, चेन्नई-व्लादिवोस्तोक मार्ग, और उत्तरी समुद्री मार्ग को बढ़ावा देने की बात कही। मंटुरोव के साथ 26वीं भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग (IRIGC-TEC) की बैठक में दीर्घकालिक उर्वरक आपूर्ति और भारतीय कुशल श्रमिकों (आईटी, निर्माण, इंजीनियरिंग) की रूस में माँग पर भी चर्चा हुई।

यूक्रेन युद्ध और भारत की स्थिति

जयशंकर ने पुतिन के साथ यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा की, जिसमें भारत ने हमेशा बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत की। उन्होंने 2024 में मोदी की मॉस्को और कीव यात्राओं का हवाला देते हुए कहा कि भारत रूस और यूक्रेन को तुरंत बातचीत शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

पुतिन ने अलास्का में ट्रंप के साथ 15 अगस्त की मुलाकात में यूक्रेन शांति पर चर्चा की थी, जहाँ उन्होंने डोनबास, नाटो, और पश्चिमी सैनिकों पर अपनी मांगें रखीं। जयशंकर ने ट्रंप के टैरिफ को “हैरान करने वाला” बताया, यह कहते हुए कि भारत रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार नहीं है (चीन है), और अमेरिका ने ही भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर करने के लिए रूसी तेल खरीदने को कहा था।

पुतिन की भारत यात्रा की तैयारी

जयशंकर की यात्रा का उद्देश्य नवंबर या दिसंबर में पुतिन की प्रस्तावित भारत यात्रा और वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारी करना था। उन्होंने पुतिन को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएँ दीं। इससे पहले 7 अगस्त को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल भी पुतिन से मिले थे, और मोदी ने 10 अगस्त को पुतिन के साथ फोन पर यूक्रेन मुद्दे पर बात की थी।

वैश्विक मंचों पर सहयोग

जयशंकर और लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार, BRICS, SCO, और G20 में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई। जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस जटिल वैश्विक परिस्थितियों में भी नेतृत्व स्तर पर नियमित संवाद बनाए रखे हैं।

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