केरल विधानसभा चुनाव के परिणाम आने को हैं और वायनाड जिले में राजनीतिक गतिविधियाँ चरम पर पहुंच गई हैं। इस बार वायनाड में तीन प्रमुख गठबंधनों – यू.डी.एफ., एल.डी.एफ. और एन.डी.ए. ने अपनी-अपनी जीत की उम्मीद जताई है।
यू.डी.एफ. को साफ जीत का भरोसा है और वे पूरे जिले में मजबूत स्थिति बनाए रखने के लिए आश्वस्त नजर आ रहे हैं। यू.डी.एफ. का मानना है कि उनकी मजबूत जनप्रतिनिधि नीति और विकास कार्यों की बदौलत वे अच्छी पकड़ बनाए रखेंगे।
वहीं, एल.डी.एफ. को भी अपनी सीटों में वृद्धि का विश्वास है। उन्हें उम्मीद है किhill जिले में उनके सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दे लोगों के बीच अधिक प्रभावशाली साबित होंगे। एल.डी.एफ. ने चुनाव प्रचार के दौरान विशेषकर ग्रामीण इलाकों और हिल ट्रैक्ट्स में अपनी गतिविधियों को तेज किया है।
एन.डी.ए. ने भी वायनाड में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की योजना बनाई है। हालांकि उनका प्रभाव पहले की तुलना में कम था, पर इस बार वे अपनी रणनीति बदलकर अधिक व्यापक रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। एन.डी.ए. ने युवा वर्ग और नए मतदाताओं को लक्षित करके समर्थन जुटाने का प्रयास किया है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि वायनाड की यह स्थिति केरल की Gesamt चुनावी तस्वीर के लिए महत्वपूर्ण है। यहां की लोकल राजनीति का प्रभाव राज्य की राजनैतिक दिशा पर गहरा असर डाल सकता है। मतगणना की प्रक्रिया 4 मई को निर्धारित है, जिसके परिणाम पूरे राज्य में उत्सुकता से देखे जायेंगे।
वायनाड में मतदाताओं का उत्साह और राजनीतिक दलों की सक्रियता इस चुनाव को बेहद प्रतिस्पर्धात्मक बना रही है। सभी गठबंधनों ने पूरा जोर लगा रखा है और उनकी रणनीतियां अंतिम चरण में परवान चढ़ रही हैं। ऐसे में जनता की मंशा ही यहां के परिणाम तय करेगी।
इस चुनाव परिणाम से राज्य में सत्ता की दिशा भी प्रभावित होगी, इसलिए वायनाड समेत पूरे केरल में राजनीतिक दलों की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं। विकास, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय कल्याण के मुद्दे इस चुनाव की मुख्य परिस्थितियाँ बनी हैं।

