महाराष्ट्र: विशेषाधिकार समिति के समक्ष सुषमा अंधारे ने दिए जवाब, प्रसाद लाड ने किए 22 सवाल

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    मुंबई। महाराष्ट्र विधान परिषद की विशेषाधिकार समिति के समक्ष शिवसेना (यूबीटी) की नेता सुषमा अंधारे पेश हुईं, जहां उन पर कई सवाल उठाए गए। समिति के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने उनसे कुल 22 सवाल पूछे, जिनका उन्होंने पूरी शिद्दत से जवाब दिया। यह मामला उस संदर्भ में आया जब स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने मार्च 2025 में एकनाथ शिंदे के खिलाफ व्यंग्य कविता लिखी थी, जिस पर सुषमा अंधारे ने खुलकर समर्थन जताया था। इससे विवाद ने जन्म लिया और प्रवीण दारेकर ने इसके आधार पर अधिकारों के हनन का प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया था।

    सुषमा अंधारे ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने किसी भी प्रकार की गलत टिप्पणी नहीं की है और माफी मांगने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने समिति के फैसले को पूरी तरह स्वीकार करने का भी आश्वासन दिया। प्रसाद लाड ने बताया कि समिति ने उनके जवाब रिकॉर्ड में दर्ज किए हैं और मामले की गहन जांच की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि यदि सुषमा अंधारे माफी मांगती हैं तो उस पर अलग फैसले होंगे।

    विशेषाधिकार समिति की इस सुनवाई से जुड़े और भी कई पहलुओं पर शिवसेना के अन्य नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। मनीषा कायंदे ने कहा कि कई सवालों के जवाब अभी अधूरे हैं और प्रक्रिया जारी है, इसलिए अब सुषमा अंधारे को मिलने वाली सजा के बारे में कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। वहीं, अनिल परब ने भी यह स्पष्ट किया कि सुषमा ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की थी, बल्कि उनका विरोध उन लोगों के खिलाफ था जिन्होंने स्टूडियो तोड़ा था। उन्होंने यह भी कहा कि कुणाल कामरा के गीत में उपमुख्यमंत्री का नाम तक नहीं आता।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील पर भी प्रसाद लाड ने अपनी राय रखी, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री की दूरदर्शिता और जनता से सोना न खरीदने व ईंधन बचाने के निर्देश पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री की अपील को पूरी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है ताकि देश आने वाली आर्थिक चुनौतियों का सामना कर सके। लाड ने राहुल गांधी की इस अपील की आलोचना को गंभीरता से न लेने की बात भी कही।

    यह घटना राजनीतिक विवादों के बीच आई है, जो महाराष्ट्र के वर्तमान राजनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना रही है। साथ ही समिति की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि विधान परिषद गंभीरता से इस मामले की जांच कर रही है और किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और जनता की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य और विधायिका की मर्यादा के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

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