मांडलगढ़ थाना पुलिस ने खंगारजी का खेड़ा के सुनसान जंगल में मिली अज्ञात युवक की निर्मम हत्या का खुलासा कर दिया है। इस अंधे कत्ल की गुत्थी बुधवार को सुलझाई गई है। पुलिस ने इस मामले में मृतक के करीबी दोस्त समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पैसों और आभूषणों की लालच में यह जघन्य अपराध किया था।
18 अप्रैल 2026 को जंगल में 2-3 दिन पुरानी सड़ी हुई लाश मिलने से मामला सामने आया था। मृतक के गले पर धारदार हथियार से चोट के निशान थे और सिर पर पत्थर से गंभीर चोट लगी थी। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करना थी जिससे जांच में गति मिल सके।
मृतक की जेब से मिली ‘अर्बुदा फार्मेसी’ की दवा की शीशी के आधार पर पुलिस को पता चला कि यह दवा केवल जालौर जिले के भीनमाल क्षेत्र में मिलती है। इससे मृतक की पहचान नगाराम पुत्र भूराराम चौधरी, निवासी नया मोरसीम थाना बागोड़ा, जिला जालौर के रूप में हुई।
एसपी के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के माध्यम से नगाराम के करीबी किशन पुत्र श्यामलाल ओड को संदिग्ध पाया। किशन हत्या के बाद दिल्ली फरार हो गया था जिसे पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ में किशन ने अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या की बात कबूल की।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने नगाराम को अफीम दिलाने का झांसा दिया और उसे पैसों के लालच में मांडलगढ़ बुलाया। यहां उन्हें जंगल में ले जाकर किशन व अन्य आरोपियों ने नगाराम का गला ब्लेड से रेतकर और सिर पर पत्थर मारकर हत्या कर दी। इसके बाद 70,000 रुपए नकद और सोने के लॉन्ग लूटकर फरार हो गए।
मांडलगढ़ पुलिस ने किशन के अलावा कमलेश, ईश्वर और विनोद नामक अन्य तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। इस सफल गिरफ्तारी में थानाधिकारी घनश्याम मीणा, बडलियास थानाधिकारी जसवंत सिंह व कांस्टेबल महेंद्र बिडियासर, मूलचन्द और रामराज की भूमिका अहम रही है।
यह केस न केवल अपराध की क्रूरता को दर्शाता है बल्कि दोस्ती के भरोसे को तोड़ने वाले विश्वासघात की भी भयावहता को उजागर करता है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करते हुए न्याय प्रदान करने का आश्वासन दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

