सिवनी, राष्ट्रबाण। मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव सिंघोड़ी में जन्मे ओमप्रकाश सनोडिया कभी मेहनतकश किसानों के बीच गर्व का विषय थे। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर अफसर बनने तक की उनकी यात्रा ने गांववालों को प्रेरित किया था। ग्रामीणों ने उन्हें सम्मान और प्यार से सिर पर बैठाया, गांव का गौरव बताया। लेकिन आज वही ओमप्रकाश ग्रामीण किसानों की परेशानी का कारण बने हुए हैं। किसानों का कहना है कि अफसर बनने के बाद ओमप्रकाश ने अपने पद की ताकत और पैसों के बल पर उन्हीं किसानों की जमीनों पर कब्जा करने की साजिश रच डाली, जिन्होंने उन्हें कभी अपना बेटा और भाई कहा था।
किसानों के आरोप, धारा 250 के तहत दबाव में केस करवा रहे हैं
गांव के आधा दर्जन से अधिक किसानों ने आरोप लगाया है कि ओमप्रकाश सनोडिया राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर दबाव बनाकर अपने परिवार के नाम पर किसानों की जमीनें हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि धारा 250 के तहत झूठे केस दर्ज कर जमीनों पर कब्जे की कार्रवाई की जा रही है। यह सब कुछ ओमप्रकाश के दबाव में हो रहा है, ताकि उनकी पारिवारिक जमीनों का क्षेत्र बढ़ाया जा सके। ग्रामीण किसान अब कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे इस पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से करेंगे और निष्पक्ष जांच की मांग उठाएंगे। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पटवारी अभिजीत मिश्रा की मिलीभगत से किसानों के खिलाफ झूठी सीमांकन रिपोर्ट तैयार की गई है।
पटवारी पर भी गंभीर आरोप, रिश्वत और पक्षपात का खेल!
गांव के ही किसान महेंद्र सनोडिया ने पटवारी अभिजीत मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महेंद्र का कहना है कि गांव में लगभग 50 एकड़ शासकीय जमीन पर अवैध कब्जे हैं, लेकिन पटवारी केवल उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है जो रिश्वत नहीं देते। महेंद्र ने बताया कि पटवारी उनसे रिश्वत की मांग करता है, और जब उन्होंने देने से मना किया, तो उनके खिलाफ अतिक्रमण की कार्रवाई शुरू कर दी गई।
महेंद्र के अनुसार, गांव की 50 एकड़ जमीन पर कई लोगों ने अवैध कब्जा किया है, लेकिन पटवारी सिर्फ मेरे खिलाफ नोटिस जारी कर रहा है। बाकी कब्जेदारों से वह बड़ी रकम वसूल कर आंखें मूंदे बैठा है।
कलेक्टर से न्याय की उम्मीद
किसानों ने जिला कलेक्टर से इस पूरे मामले की शिकायत करने की बात कही है। उनका कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, तो किसानों का गुस्सा भड़क सकता है। किसानों ने यह भी मांग की है कि ओमप्रकाश सनोडिया और पटवारी अभिजीत मिश्रा के खिलाफ जांच बिठाई जाए तथा झूठी सीमांकन रिपोर्ट को रद्द किया जाए। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि जिस व्यक्ति ने गांव का नाम रोशन किया था, वही अब गांव की एकता और शांति को तोड़ रहा है। किसानों के मुताबिक, ओमप्रकाश सनोडिया अब अपने पद का दुरुपयोग कर न्याय के तंत्र को प्रभावित कर रहा हैं, जिससे गरीब किसान भय और अन्याय के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
भ्रष्टाचार और प्रशासन का गठजोड़ का उदाहरण बनता मामला
यह पूरा प्रकरण सिर्फ एक गांव का विवाद नहीं, बल्कि यह बताता है कि किस तरह सत्ता, पैसे और पद की ताकत मिलकर आम आदमी के अधिकारों को कुचल सकती है। किसानों की जमीनों पर कब्जे की साजिश, सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत और रिश्वतखोरी का यह जाल प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े करता है।
किसानों का कहना है, हम डरेंगे नहीं, न्याय लेंगे
गांव के किसानो ने बताया, “हमने ओमप्रकाश को कभी अपने बेटे और भाई जैसा माना था। जब वह अफसर बना तो पूरे गांव ने जश्न मनाया। लेकिन अब वही भाई और बेटा हमारे खिलाफ हो गया है। जमीन के लालच ने उसे अंधा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे न्याय के लिए प्रशासनिक और कानूनी दोनों रास्ते अपनाएंगे। हम न रिश्वत देंगे, न जमीन छोड़ेंगे। हमारी मेहनत की मिट्टी किसी के लालच का शिकार नहीं बनने देंगे।
प्रशासन से जांच की मांग
किसानों ने जिला प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पटवारी अभिजीत मिश्रा और ओमप्रकाश सनोडिया पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक गांव में तनाव की स्थिति बनी रहेगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना देंगे।
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