नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले के दोषी को जमानत मिली

Rashtrabaan

    मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को नरेंद्र दाभोलकर हत्या मामले के एक दोषी शरद कालास्कर को जमानत granted की है, जैसा कि लाइव लॉ की रिपोर्ट में बताया गया है। न्यायाधीश अजय गडकरी और रंजीतसिंह भोंसले की पीठ ने कालास्कर को संदिग्ध के रूप में चिन्हित करने को लेकर भी संदेह व्यक्त किया है, द हिन्दू के अनुसार। विस्तृत आदेश का इंतजार जारी है।

    नरेंद्र दाभोलकर, जो महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक थे, को पुणे में अगस्त 2013 में गोली मार दी गई थी। मई 2024 में पुणे की एक विशेष अदालत ने शरद कालास्कर और सचिन अंदुरे को हत्या के दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

    वहीं, अन्य तीन आरोपियों – वीरेंद्रसिंह तवाडे, विक्रम भावे और संजीव पुनालेकर – को बरी कर दिया गया था। इस मामले की सुनवाई लगभग तीन वर्षों तक चली। दाभोलकर की बेटी ने तवाडे, भावे और पुनालेकर की बरी होने के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जैसा कि द हिन्दू ने बताया। इसके साथ ही कालास्कर ने अपनी सजा के खिलाफ अपील करते हुए जमानत की भी मांग की थी।

    बुधवार को उच्च न्यायालय ने कालास्कर को 50,000 रुपये के जमानत बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने जमानत आदेश को चार सप्ताह के लिए स्थगित करने की मांग की थी।

    न्यायाधीशों ने कहा, “चूंकि हमने पहले ही कालास्कर की पहचान को लेकर संदेह व्यक्त किया है…” इस मामले में आगे की सुनवाई जारी रहेगी और विस्तृत निर्णय आने पर न्यायालय अपनी अंतिम राय देगा।

    यह घटना देश में अंधविश्वास के खिलाफ सक्रिय कार्यकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मोड़ है। दाभोलकर ने अपने जीवन में अंधविश्वास और कुप्रथाओं के खिलाफ जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई थी। उनके निधन के बाद भी उनकी विरासत और विचारधारा लगातार जीवित हैं, और न्याय की लड़ाई जारी है।

    इस फैसले पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोग इसे न्याय की उपलब्धि मानते हैं, जबकि अन्य इस पर सवाल उठा रहे हैं। आगामी सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुना जाएगा।

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