नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे में हवाई यात्रा की तरह सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की खबरों का खंडन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दशकों पुराना नियम है, जो प्रथम श्रेणी AC में 70 किलो, द्वितीय AC में 50 किलो, स्लीपर में 40 किलो, और सेकंड क्लास में 35 किलो मुफ्त सामान की अनुमति देता है। उन्होंने कहा, “इसका मतलब यह नहीं कि तय सीमा से अधिक सामान पर अतिरिक्त किराया वसूला जाएगा। कोई नया नियम नहीं बनाया गया है।” यह बयान उन खबरों के जवाब में आया, जिनमें दावा किया गया था कि रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से सामान का वजन और साइज चेक होगा, और अतिरिक्त सामान पर जुर्माना लगेगा।
पुराने नियम, कोई नई सख्ती नहीं
रिपोर्ट्स में कहा गया था कि रेलवे हवाई अड्डों की तर्ज पर सख्त नियम लागू करेगा, जिसमें 10 किलो से अधिक अतिरिक्त सामान को पहले से बुक करना होगा, अन्यथा जुर्माना देना पड़ेगा। यह भी दावा था कि स्टेशनों पर बैगेज स्कैनर लगाए जाएँगे। वैष्णव ने इन खबरों को निराधार बताया और कहा कि रेलवे का फोकस यात्रियों की सुविधा पर है, न कि उन पर अनावश्यक बोझ डालने पर। उन्होंने जोर देकर कहा कि मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, और रेलवे यात्रियों की सहूलियत के लिए काम कर रहा है।
त्योहारों पर विशेष ट्रेनों का इंतजाम
वैष्णव ने बिहार में दिवाली-छठ और महाराष्ट्र में गणपति पर्व के लिए विशेष ट्रेनों की व्यवस्था पर विपक्ष के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पिछले साल छठ के लिए 7,000 विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं, और इस साल भी 12,000 ट्रेनों की योजना है। महाकुंभ के दौरान भी बड़ी संख्या में ट्रेनें चलाई गईं। उन्होंने स्पष्ट किया, “हम चुनावी राज्यों को देखकर नहीं, बल्कि यात्रियों की जरूरतों के आधार पर ट्रेनें चलाते हैं।” महाराष्ट्र में गणपति पर्व के लिए 400 विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जो त्योहारी भीड़ को संभालने के लिए थीं।
रेलवे की प्रगति और भविष्य
वैष्णव ने रेलवे की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। 2023-24 में रेलवे का राजस्व 2.78 लाख करोड़ रुपये रहा, जो खर्च (2.75 लाख करोड़) से अधिक है। उन्होंने वंदे भारत ट्रेनों की लोकप्रियता का जिक्र किया, जिनका उपयोग 31 मार्च 2024 तक 2.15 करोड़ यात्रियों ने किया। सितंबर 2025 में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन लॉन्च होने वाली है, जो मध्यम वर्ग के लिए आरामदायक और किफायती होगी। इसके अलावा, हाइड्रोजन ट्रेन और अमृत भारत ट्रेनें भी रेलवे को पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम हैं।
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