मास्को, राष्ट्रबाण: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के साथ शांति समझौते के लिए तीन प्रमुख मांगें सामने रखी हैं: डोनबास क्षेत्र का पूर्ण नियंत्रण, यूक्रेन का नाटो में शामिल न होना, और देश में पश्चिमी सैनिकों की तैनाती पर रोक। ये मांगें 15 अगस्त 2025 को अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई तीन घंटे की शिखर वार्ता के बाद सामने आई हैं। इस मुलाकात में यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर चर्चा हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हुआ। पुतिन ने कहा कि यह बैठक शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, जबकि ट्रंप ने इसे “बेहद उपयोगी” बताया।
पुतिन का डोनबास और नाटो पर अड़ियल रुख
पुतिन ने अपनी नई शर्तों में डोनबास (डोनेत्स्क और लुहान्स्क) के उन हिस्सों से यूक्रेन की पूर्ण वापसी की मांग की है, जो अभी उसके नियंत्रण में हैं। रूस डोनबास का 88% और खेरसॉन-जापोरिज्जिया का 73% हिस्सा पहले ही नियंत्रित कर रहा है। बदले में, पुतिन ने खारकीव, सूमी, और निप्रोपेत्रोव्स्क के छोटे हिस्सों को लौटाने की पेशकश की है। इसके अलावा, पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन नाटो में शामिल होने की मंशा छोड़ दे और नाटो से कानूनी रूप से बाध्यकारी गारंटी ले कि वह पूर्व की ओर विस्तार नहीं करेगा। पश्चिमी सैनिकों की यूक्रेन में तैनाती पर भी रोक की मांग की गई है।
पिछले साल जून 2024 में पुतिन ने डोनबास, खेरसॉन, जापोरिज्जिया, और क्रीमिया (2014 में रूस द्वारा कब्जा) सहित चार प्रांतों पर पूर्ण नियंत्रण की मांग की थी, जिसे यूक्रेन ने आत्मसमर्पण बताकर खारिज कर दिया था। नई मांगों में पुतिन ने खेरसॉन और जापोरिज्जिया में युद्ध को मौजूदा मोर्चे पर रोकने की बात कही है, जो पहले की तुलना में नरम रुख दिखाता है।
अलास्का शिखर वार्ता
15 अगस्त को अलास्का के जॉइंट बेस एल्मेंडॉर्फ-रिचर्डसन में हुई ट्रंप-पुतिन मुलाकात में कोई सीजफायर समझौता नहीं हुआ। ट्रंप ने पहले सीजफायर पर जोर दिया था, लेकिन बैठक के बाद वे पुतिन के रुख के साथ आए, जो सीधे स्थायी शांति समझौते की बात करता है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि दोनों नेताओं ने “जमीन के आदान-प्रदान” और यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर चर्चा की, जिसमें नाटो-जैसी सुरक्षा व्यवस्था शामिल हो सकती है, बशर्ते यूक्रेन नाटो में शामिल न हो। ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से कहा कि वह “सौदा करें”, क्योंकि “रूस एक बड़ी ताकत है।”
ज़ेलेंस्की ने डोनबास छोड़ने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि यह यूक्रेन के संविधान के खिलाफ है और भविष्य में रूसी हमलों का आधार बन सकता है। उन्होंने स्थायी शांति के लिए नाटो-जैसी “मजबूत सुरक्षा गारंटी” और रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों की वापसी की मांग की।
यूरोप और यूक्रेन की चिंताएँ
यूरोपीय नेताओं, जैसे ब्रिटेन के कीर स्टार्मर और फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों, ने कहा कि यूक्रेन को अपनी शर्तों पर फैसला लेने का हक है और रूस को नाटो या यूरोपीय संघ में यूक्रेन के प्रवेश पर वीटो नहीं मिलना चाहिए। नॉर्डिक और बाल्टिक देशों ने पुतिन पर भरोसा न करने की चेतावनी दी। ज़ेलेंस्की ने कहा कि बिना सीजफायर के शांति वार्ता जटिल होगी, क्योंकि रूस हमले जारी रखे हुए है।
ट्रंप ने 18 अगस्त को व्हाइट हाउस में ज़ेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ बैठक की, जिसमें त्रिपक्षीय शिखर वार्ता (ट्रंप, पुतिन, ज़ेलेंस्की) की योजना बनी। हालांकि, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि ऐसी बैठक के लिए “चरणबद्ध तैयारी” जरूरी है। रूस की मांगों और यूक्रेन की अस्वीकृति के बीच शांति समझौता मुश्किल दिख रहा है।
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