दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण: स्कूलों के लिए नया आदेश, 9वीं तक हाइब्रिड मोड में होंगी क्लासेज

दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के साथ ही बच्चों की सेहत को देखते हुए दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने स्कूलों के लिए बड़ा फैसला लिया है। ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू होने के बाद राजधानी के स्कूलों में नर्सरी से लेकर 9वीं कक्षा तक और 11वीं कक्षा के छात्रों के लिए हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने के आदेश जारी किए गए हैं। इसका मतलब यह है कि स्कूलों में पढ़ाई अब फिजिकल और ऑनलाइन-दोनों विकल्पों में होगी, ताकि अभिभावक और छात्र अपनी सुविधा और सुरक्षा के अनुसार विकल्प चुन सकें।

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    नई दिल्ली, राष्ट्रबाण। दिल्ली में बीते कुछ दिनों से प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को हालात तब और गंभीर हो गए, जब राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) शाम होते-होते 400 के पार पहुंच गया। कुछ ही घंटों में AQI 428 दर्ज किया गया, जो ‘सीवियर+’ श्रेणी की दहलीज के बेहद करीब है। प्रदूषण के इस खतरनाक स्तर को देखते हुए प्रशासन को एक बार फिर सख्त कदम उठाने पड़े।

    ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू

    वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने हालात बिगड़ने पर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत स्टेज-IV यानी ग्रैप-4 की पाबंदियां लागू कर दीं। यह ग्रैप का सबसे कड़ा चरण होता है, जिसमें निर्माण गतिविधियों पर रोक, वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण और अन्य सख्त उपाय शामिल होते हैं। इन पाबंदियों का सीधा असर स्कूलों और बच्चों की दिनचर्या पर भी पड़ा है।

    स्कूलों के लिए हाइब्रिड मोड का आदेश

    ग्रैप-4 लागू होने के बाद दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DOE) ने स्कूलों के लिए नया आदेश जारी किया। इस आदेश के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में DOE, NDMC, MCD और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे अगली सूचना तक नर्सरी से 9वीं कक्षा तक और 11वीं कक्षा के छात्रों के लिए हाइब्रिड मोड में क्लासेज चलाएं।

    हाइब्रिड मोड का मतलब क्या है?

    हाइब्रिड मोड का अर्थ है कि स्कूलों में पढ़ाई फिजिकल (स्कूल आकर) और ऑनलाइन—दोनों तरीकों से होगी। जहां ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां छात्रों को यह विकल्प दिया जाएगा कि वे घर से ऑनलाइन क्लास अटेंड कर सकें। स्कूल आने या न आने का फैसला छात्रों और उनके अभिभावकों पर छोड़ा गया है।

    अभिभावकों को मिलेगा विकल्प

    आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प चुनने का अधिकार पूरी तरह छात्रों और उनके माता-पिता के पास होगा। स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस फैसले की जानकारी तुरंत सभी अभिभावकों तक पहुंचाएं, ताकि वे बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए सही निर्णय ले सकें।

    स्कूलों की निगरानी के निर्देश

    दिल्ली सरकार ने सिर्फ आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारी खत्म नहीं की है, बल्कि इसके पालन को सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था भी तय की है। सभी डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन (DDE) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जोन और जिलों के स्कूलों का दौरा करें और यह सुनिश्चित करें कि हाइब्रिड मोड से जुड़े निर्देशों का सही तरीके से पालन हो रहा है।

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