आवारा कुत्तों पर आदेश के बाद बोले SC जज, कुत्तों ने भी दिया आशीर्वाद

Rahul Maurya

नई दिल्ली, राष्ट्रबाण: दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चर्चा बटोरी है। जस्टिस विक्रम नाथ, जिन्होंने इस मामले में अहम भूमिका निभाई, ने मजाकिया अंदाज में कहा कि “आवारा कुत्तों ने मुझे दुनिया भर में मशहूर कर दिया।” तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि इस फैसले के बाद उन्हें डॉग लवर्स से शुभकामनाएँ मिल रही हैं। यह मामला मानव-कुत्ता टकराव को संतुलित करने की कोशिश को दर्शाता है।

कुत्तों के कारण बटोरी सुर्खियाँ

जस्टिस विक्रम नाथ ने तिरुवनंतपुरम में ‘ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट’ पर आयोजित एक सम्मेलन में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मैं अब तक कानूनी क्षेत्र में अपने काम के लिए जाना जाता था, लेकिन आवारा कुत्तों के मामले ने मुझे देश-विदेश में पहचान दिलाई।” उन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई को धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस मामले को उनकी बेंच को सौंपा। यह टिप्पणी न केवल उनकी विनम्रता को दर्शाती है, बल्कि इस संवेदनशील मुद्दे की व्यापकता को भी उजागर करती है।

सुप्रीम कोर्ट का संशोधित आदेश

11 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखने का सख्त आदेश दिया था, जिसका भारी विरोध हुआ। इसके बाद 22 अगस्त को जस्टिस विक्रम नाथ की अगुआई वाली बेंच ने इस आदेश में बदलाव किया। नए आदेश में कहा गया कि कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जाए, जहाँ से उन्हें पकड़ा गया, सिवाय उन कुत्तों के जो रेबीज से संक्रमित या आक्रामक हों। कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक लगाई और नगर निगमों को फीडिंग जोन बनाने का निर्देश दिया।

मानव-कुत्ता टकराव का जटिल मुद्दा

यह मामला तब गंभीर हुआ, जब दिल्ली में एक 6 साल की बच्ची की रेबीज से मौत और अन्य कुत्तों के हमलों की खबरें सामने आईं। 11 अगस्त के आदेश में कोर्ट ने कहा था कि कुत्तों को शेल्टर में रखा जाए और सड़कों पर वापस न छोड़ा जाए। लेकिन डॉग लवर्स और पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे अव्यवहारिक और अमानवीय बताया। मेनका गांधी ने इस संशोधित फैसले को “वैज्ञानिक” करार दिया, क्योंकि नसबंदी और टीकाकरण से कुत्तों की आबादी और हमले कम हो सकते हैं।

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