महाराष्ट्र में स्व-गणना की शुरुआत, रामदास अठावले ने जाति जनगणना के लाभ बताए

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    मुंबई। महाराष्ट्र में राज्य स्थापना दिवस के मौके पर 2027 की जनगणना के लिए स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य में यह स्व-गणना 1 मई से 15 मई तक चलेगी, जिसके बाद जनगणना कर्मी 16 जून से 14 जून तक घर-घर जाकर विस्तृत सर्वेक्षण करेंगे। केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने इस प्रक्रिया की महत्ता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जाति जनगणना से सरकार प्रत्येक जाति की स्थिति का सटीक आंकलन कर उनकी सहायता बेहतर ढंग से कर पाएगी।

    रामदास अठावले ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि इस बार की जनगणना प्रक्रिया तथा जाति जनगणना से राज्य और देश की जनसंख्या पर व्यापक और सटीक जानकारी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि पहले केवल अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति की जनगणना होती थी, लेकिन अब यह पूरे देश के लिए सभी धर्मों और जातियों के आधार पर की जाएगी। इस पहल से क्या-क्या लाभ होंगे, उन्होंने विस्तार से बताया।

    अठावले ने बताया कि जाति जनगणना से यह पता चलेगा कि प्रत्येक जाति का प्रतिशत क्या है, उनके रोजगार के अवसर, किसान होने या गरीब होने की स्थिति, तथा कितने लोग आवासहीन हैं। इस सटीक जानकारी का इस्तेमाल सरकार प्रत्येक जाति के विकास के लिए नीतियां बनाने में करेगी। इसके अलावा उन्होंने जनता से अपील की कि जब जनगणना अधिकारी उनके घर आएं तो उनका पूरी समझदारी और सहयोग करें, जिससे यह कार्य प्रभावी ढंग से पूरा हो सके।

    इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में पहले चरण में हाउस लिस्टिंग जनगणना चल रही है और उसके बाद जनसंख्या गणना होगी। अठावले ने कहा कि राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र में स्व-गणना शुरुआत करना इस महत्त्वपूर्ण जनगणना प्रक्रिया की शुरुआत के लिए एक शुभ संकेत है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कर्तव्य में भाग लेने की अपील की।

    यह जनता की सहभागिता ही है जो जनगणना को सफल बना सकती है और जिससे सरकार की योजनाएं सही दिशा में मार्गदर्शित हो सकेंगी। इस तरह की विस्तृत और सटीक जनगणना से महाराष्ट्र और पूरे देश के विकास में बड़ा योगदान मिलेगा।

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