शहाबुद्दीन रजवी की सुवेंदु सरकार से अपील, बंगाल में कोई भी समुदाय ना हो भेदभाव का शिकार

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    बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के नेशनल प्रेसिडेंट मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर अपनी गंभीर टिप्पणियां की हैं। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले सुवेंदु अधिकारी को संवैधानिक पद की पूरी जिम्मेदारी निभाने की सलाह दी है। मौलाना रजवी ने कहा कि सरकार को सभी समुदायों को समान सम्मान और अधिकार देना चाहिए, जिससे किसी भी तरह का भेदभाव न हो।

    मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री को सभी लोगों का मुख्यमंत्री होना चाहिए, चाहे उन्होंने वोट दिया हो या नहीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे ‘सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास’ को बंगाल सरकार के लिए मार्गदर्शक मानने की अपील की। उनका मानना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को समान व्यवहार करना अनिवार्य है और किसी भी समुदाय के प्रति पक्षपात सरकार की छवि को कमजोर कर सकता है।

    उन्होंने बंगाल में राजनीतिक माहौल को लेकर कहा कि कुछ कट्टरपंथी तत्व, खासकर बांग्लादेश से, बंगाल के चुनाव एवं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर अनुचित टिप्पणी कर रहे हैं। मौलाना रजवी ने इन तत्वों को स्पष्ट चेतावनी दी कि वे इस तरह की हिमाकत न करें, क्योंकि हम अपने विरोधियों को भी उसे मुँहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं। उन्होंने भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप को पूरी तरह गलत ठहराया और कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ चुनाव का संचालन शांतिपूर्ण और स्वतंत्र रूप से होता है।

    इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल मामले में बांग्लादेश का हस्तक्षेप किसी भी दशा में स्वीकार्य नहीं होगा। मौलाना रजवी का यह स्पष्ट संदेश है कि विदेशी ताकतों को भारत की राजनीति में घुसपैठ नहीं करनी चाहिए। वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) लिबरेशन के सेक्रेटरी दीपांकर भट्टाचार्य ने इस मौके पर भाजपा पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर भाजपा का शपथ लेना विरोधाभासी है क्योंकि भाजपा ने टैगोर का अपमान किया है।

    इस प्रकार पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में विभिन्न दलों और समुदायों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी की अपील साफ संदेश देती है कि संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं को समानता और न्याय के सिद्धांतों को सर्वोपरि रखना चाहिए ताकि सामाजिक सौहार्द और सहयोग कायम रह सके।

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