हैदराबाद में थिएटर प्रेमियों के लिए एक खास पहल पुनः लौट रही है, जो न केवल मंचीय कला को नजदीक लाती है बल्कि समाज के हर वर्ग तक इसे पहुँचाने का काम भी करती है। यह पहल है भूमिका की, जिसने अपने संस्थापक उदय भानु गरिकिपाटी की याद में एक नई शुरुआत की है। उदय भानु की सांस्कृतिक विरासत को सम्मानित करते हुए, भूमिका अब एक व्यापक शहरव्यापी त्योहार के माध्यम से दरवाजे तक थिएटर पहुँचाने का संकल्प ले रहा है।
दरवाजे पर थिएटर का यह कार्यक्रम दर्शकों को पारंपरिक थिएटर हॉल की सीमाओं से बाहर निकाल कर उनके अपने इलाके, मोहल्ले और गली-नुक्कड़ तक थिएटर को ले आता है। इस पहल का उद्देश्य न केवल मनोरंजन प्रदान करना है, बल्कि कला के द्वारा सामाजिक संवाद और सांस्कृतिक जागरूकता को भी बढ़ावा देना है।
भूूमिका के सदस्य बताते हैं कि कोविड-19 महामारी के दौर में जब थिएटर जगत को भारी नुकसान हुआ, तब उन्होंने यह सोचा कि कैसे थिएटर को फिर से लोगों के करीब लाया जाए। दरवाजे पर थिएटर और शहरव्यापी त्योहार के माध्यम से, उन्होंने इस लक्ष्य की दिशा में गंभीर कदम बढ़ाए हैं।
इस वर्ष के उत्सव में विभिन्न हिंदी और स्थानीय भाषाओं के नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे, जो सामाजिक मुद्दों को उजागर करने के साथ-साथ पारंपरिक कथाओं को भी जीवंत बनाएंगे। मंच पर कलाकारों की विविधता और विषयों की बहुलता इस पहल की विश्वसनीयता और व्यापकता को दर्शाती है।
हैदराबाद के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, पार्कों और खुली जगहों पर ये नाटक सजीव रूप में आम जनता के दर्शन के लिए रखे जाएंगे। इससे न केवल थिएटर की पहुंच बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी अपनी कला प्रदर्शन करने का अवसर मिलेगा।
उदय भानु गरिकिपाटी की विरासत को संजोते हुए भूमिका ने यह साबित कर दिया है कि थिएटर केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज में परिवर्तन और सांस्कृतिक संवाद का एक सशक्त माध्यम है। इस पहल की सफलता भविष्य में और भी बड़े और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रेरणा बनेगी।
इस श्रृंखला की योजना और आयोजन में स्थानीय प्रशासन तथा विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों का भी सहयोग शामिल है, जो इसे और अधिक प्रभावशाली बनाने में सहायक होगा। भूमिकाके इस नए उत्सव को न केवल हैदराबाद बल्कि पूरे क्षेत्र में थिएटर कला की पुनरुत्थान प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

