मुर्शिदाबाद, राष्ट्रबाण: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस TMC विधायक जीबन कृष्ण साहा के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। बरयान विधानसभा क्षेत्र के इस विधायक ने छापेमारी के दौरान अपना मोबाइल फोन पास की झाड़ियों में फेंककर भागने की कोशिश की, लेकिन ईडी की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यह छापेमारी शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच से जुड़ी है, जिसमें साहा पहले भी सीबीआई की रडार पर रह चुके हैं। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर हलचल मचाई, बल्कि बंगाल की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।
छापेमारी का नाटकीय घटनाक्रम
ईडी की टीम सुबह-सुबह साहा के घर पहुंची, जिसके साथ स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बल भी मौजूद थे। जैसे ही अधिकारियों ने साहा से पूछताछ शुरू की, उन्होंने अपना मोबाइल फोन झाड़ियों में फेंक दिया और वहां से भागने की कोशिश की। लेकिन, ईडी की सतर्क टीम ने उन्हें तुरंत पकड़ लिया और फोन को बरामद कर लिया। अधिकारियों ने उनके घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए, जो शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े हो सकते हैं। साहा के घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया, और पूछताछ का सिलसिला देर रात तक चला। इस नाटकीय घटनाक्रम ने स्थानीय लोगों में भी कौतूहल पैदा कर दिया।
शिक्षक भर्ती घोटाले का पुराना मामला
जीबन कृष्ण साहा का नाम शिक्षक भर्ती घोटाले में पहले भी उछला है। अप्रैल 2023 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उनके घर पर छापेमारी की थी, जब उन्होंने दो मोबाइल फोन एक तालाब में फेंक दिए थे। सीबीआई ने उस समय तालाब का पानी निकालकर एक फोन बरामद किया था और साहा को गिरफ्तार कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट से 2024 में जमानत मिलने के बाद वे बाहर आए, लेकिन अब ईडी की ताजा कार्रवाई ने उनके खिलाफ जांच को फिर से तेज कर दिया है। इस घोटाले में पश्चिम बंगाल के स्कूल शिक्षा विभाग में गैर-कानूनी नियुक्तियों का आरोप है, जिसमें लाखों रुपये की रिश्वत लेकर अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दी गई थी।
टीएमसी और बीजेपी में सियासी जंग
इस छापेमारी ने बंगाल की सियासत को और गर्म कर दिया है। टीएमसी ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार दिया है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि बीजेपी केंद्र की सत्ता का दुरुपयोग कर टीएमसी नेताओं को निशाना बना रही है। दूसरी ओर, बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षक भर्ती घोटाले के सभी दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी हुई है, और ऐसी कार्रवाइयां बंगाल में सुशासन लाने के लिए जरूरी हैं। इस सियासी तकरार ने नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जैसे संवेदनशील इलाकों में तनाव को और बढ़ा दिया है।
जांच का अगला पड़ाव
ईडी अब साहा के मोबाइल फोन और जब्त दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि इनमें घोटाले से जुड़े अहम सबूत मिल सकते हैं। इसके अलावा, साहा के बरयान और बीरभूम जिले में संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला टीएमसी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है, खासकर तब जब 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। इस बीच, स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर चर्चा गर्म है कि क्या साहा इस बार भी जमानत हासिल कर पाएंगे, या जांच का दायरा और बढ़ेगा।
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