ट्रम्प ने स्टार्मर को तकनीकी कर पर ‘बड़ा टैरिफ’ लगाने की धमकी दी, द टेलीग्राफ रिपोर्ट

Rashtrabaan

    वॉशिंगटन: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ब्रिटेन के आवक तकनीकी कर (tech tax) को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने मीडिया संस्थान द टेलीग्राफ को बताया कि यदि ब्रिटेन इस कर को वापस नहीं लेता है तो वह ब्रिटेन पर “बड़ा टैरिफ” लगाने को तैयार हैं। यह कर अमेरिकी टेक कंपनियों को अनुचित रूप से लक्षित करने का आरोप लगाता है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक तनाव की संभावना बढ़ गई है।

    ब्रिटेन द्वारा लागू किया गया यह तकनीकी कर मुख्य रूप से अमेरिकी टेक दिग्गजों जैसे कि गूगल, फेसबुक और ऐप्पल पर केंद्रित है, जिन्हें ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर कारोबार किया जाता है। ब्रिटेन का तर्क है कि ये कंपनियां स्थानीय कर नियमों से बचती हैं, और इस कर को लगाना देश की अर्थव्यवस्था के हितों की रक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, अमेरिका ने इसे असद्वभावपूर्ण कर नीति मानते हुए वार्ता की मांग की है।

    ट्रम्प ने संवाददाताओं से कहा, “अगर उन्होंने इस कर को वापस नहीं लिया, तो हम उस पर बड़ा टैरिफ लगाएंगे। यह व्यापार के लिए अच्छा नहीं होगा और इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग प्रभावित होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी कंपनियां वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उन्हें किसी भी तरह की अनुचित टैरिफ नीति का सामना नहीं करना चाहिए।

    ब्रिटेन के लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर इस कर के पक्ष में हैं, जो देश के डिजिटल अर्थव्यवस्था पर बेहतर कर संग्रह की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 하지만 ट्रम्प की इस धमकी से आगामी नीति निर्धारण और द्विपक्षीय संबंधों में द्वंद्व की आशंका व्यक्त की जा रही है।

    विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद दो शक्तिशाली मित्र देशों के बीच मौजूदा वैश्विक व्यापार विवाद की एक नई झलक दिखाता है। अमेरिका की यह चेतावनी वैश्विक स्तर पर तकनीकी करों के मामले में एक गहन संवाद और संभावित समझौतों की जरूरत को भी दर्शाती है।

    इस विकास के चलते व्यापार विशेषज्ञ और राजनीतिक विश्लेषक इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ताओं को अहम मान रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट से बचा जा सके। ब्रिटेन के वित्त मंत्री ने भी इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि वे पारदर्शिता और सहयोग के माध्यम से समाधान खोजने के लिए तैयार हैं।

    अंत में, यह मामला वैश्विक तकनीकी कंपनियों की कर नीति और राष्ट्रों के आर्थिक हितों के संतुलन का एक जटिल उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिसे हल करने के लिए दोनों देशों के बीच संवेदनशील कूटनीतिक संवाद जरूरी होगा।

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