‘Two Women’ फिल्म समीक्षा: कनाडियन कॉमेडी पुरानी सोच में फंसी

Rashtrabaan

    च्लोए रोबिचौड द्वारा निर्देशित फिल्म ‘Two Women’ एक ऐसी कॉमेडी है जो अपनी पुरानी सोच के जाल में फंसी हुई महसूस होती है। इस फिल्म का आधार एक पुराने ट्रॉप से प्रेरित है, जो आज के समय में शायद प्रासंगिक नहीं रह गया है। हालांकि यह फिल्म हंसाने की कोशिश करती है, लेकिन इसकी संवेदनाएं और चरित्र निर्माण पिछली पीढ़ी के नजरिए को दर्शाते हैं, जिससे यह नया और ताजा प्रभाव नहीं छोड़ पाती।

    फिल्म की कहानी दो महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी दोस्ती और जीवनशैली को लेकर यह कॉमेडी स्थापित की गई है। लेकिन यहां यह समस्या सामने आती है कि कहानी पुरानी और बार-बार देखी जा चुकी कॉमिक स्थितियों पर आधारित है, जिससे दर्शक जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते। जहां एक ओर कहानी में ट्विस्ट और मजाकिया संवाद हैं, वहीं दूसरी ओर यह आधुनिकता के साथ तालमेल नहीं बैठा पाती।

    निर्देशक च्लोए रोबिचौड ने अपनी कला को पेश करने की पूरी कोशिश की है, लेकिन वह एक बार फिर भी उन पुराने विचारों को स्क्रीन पर ला देती हैं जिन्हें आज के दर्शक पुराने और रूढ़िवादी मान सकते हैं। फिल्मों में ट्रॉप एक आम बात है, लेकिन अगर वो सूचनात्मक या मजाकिया न हों तो उनका असर कम हो जाता है। ‘Two Women’ भी कुछ वैसा ही अनुभव देती है, जो फिल्म के विभिन्न पहलुओं में देखी जा सकती है।

    पात्रों का चयन भी प्रश्नचिह्न के दायरे में आता है क्योंकि वे बिल्कुल भी आधुनिक महिलाओं की विविधता और जटिलताओं को प्रतिबिंबित नहीं करते। संवाद और प्रस्तुति में एक अजीब सी पुरानी हवा महसूस होती है, जो समकालीन दर्शकों को आकर्षित करने में विफल रहती है। इसके परिणामस्वरूप, फिल्म की कॉमिक टाइमिंग सूखी और अप्रासंगिक लगती है।

    हालांकि ‘Two Women’ में कुछ हास्यप्रद क्षण नजर आते हैं, फिर भी यह संपूर्ण तौर पर देखने पर यह महसूस होता है कि यह एक ऐसी कॉमेडी है जिसने अपने विषय और प्रस्तुतिकरण के संदर्भ में सुधार की जरूरत है। यदि फिल्म ने चरित्रों को और गहराई दी होती और समकालीन सामाजिक मुद्दों को बेहतर तरीके से छुआ होता, तो निश्चित रूप से यह अधिक प्रभावशाली हो सकती थी।

    समाप्ति में कहा जा सकता है कि च्लोए रोबिचौड की यह फिल्म एक पुरानी कॉमिक सोच को दोहराती नजर आती है, जो आज के युवा और आधुनिक दर्शकों को आकर्षित करने में सफल नहीं होती। ‘Two Women’ जितनी प्रेरक लगनी चाहिए थी, उतनी दिलचस्प और ताजा नहीं लगती। यह एक चेतावनी भी है कि मनोरंजन के क्षेत्र में समय के साथ सोच और प्रस्तुति में बदलाव आवश्यक हो गया है।

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