थानेगांव नल-जल योजना की टंकी धराशायी : उपयंत्री उद्दे निलंबित, सरकारी धन का बंदरबांट कर गए जिम्मेदार और ठेकेदार

Rashtrabaan

बालाघाट, राष्ट्रबाण। बालाघाट जिले की लांजी तहसील अंतर्गत ग्राम थानेगांव में करोड़ों की लागत से बनी नल-जल योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई। महज कुछ वर्षों तक भी न टिक पाने वाली इस योजना की उच्च स्तरीय पानी की टंकी 28 अगस्त की शाम अचानक भरभराकर ढह गई। करोड़ों की लागत से बनाई गई टंकी का इस तरह धराशायी होना न केवल तकनीकी चूक बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को भी उजागर करता है।

गौरतलब है कि थानेगांव में लागू इस नल-जल योजना की कुल लागत लगभग 75 लाख 80 हजार रुपए आंकी गई थी। इसमें से 16 लाख 08 हजार रुपए की लागत से उच्च स्तरीय टंकी का निर्माण किया गया था। यह कार्य में. रायसिंह एंड कंपनी द्वारा उपयंत्री बी.एल. उद्दे की देखरेख और निरीक्षण में पूरा कराया गया था।

लापरवाही उजागर, उपयंत्री निलंबित

टंकी धराशायी होने की घटना को विभाग ने गंभीरता से लिया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जबलपुर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता एच.एस. गौड़ ने तत्काल प्रभाव से लांजी में पदस्थ उपयंत्री बी.एल. उद्दे को निलंबित कर दिया है। आदेश में साफ कहा गया है कि उपयंत्री उद्दे ने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही बरती, जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई और शासन को वित्तीय हानि उठानी पड़ी। निलंबन अवधि में उपयंत्री उद्दे का मुख्यालय लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी परियोजना मंडल कार्यालय, छिंदवाड़ा नियत किया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आगे जांच कर अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि योजना की शुरुआत से ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे थे। कई बार ग्रामीणों ने ठेकेदार और जिम्मेदार अफसरों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया, लेकिन जिम्मेदारों द्वारा कमीशन की चमक पर शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया। अब टंकी के गिरने से ग्रामीणों की शंका सही साबित हो गई। टंकी गिरने से कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन यदि घटना दिन के समय या पानी भरने के दौरान होती तो संभवतः बड़ा और गंभीर हादसा हो सकता था। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी के मलबे के कारण खेतों और आसपास की जमीन को भी नुकसान हुआ है।

सरकारी धन की खेल ली होली

16 लाख रुपए से अधिक की लागत से बनी टंकी का धराशायी होना शासन के खजाने पर सीधा डांका है। ग्रामीण अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी योजनाओं का क्या फायदा, जिनसे न तो लोगों को स्थायी सुविधा मिलती है और न ही सरकारी धन का सही उपयोग होता है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुविधा मुहैया कराना है। लेकिन थानेगांव की घटना ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आए दिन पानी की टंकियों और पाइपलाइन में गड़बड़ियों की शिकायतें मिलती रहती हैं। विभागीय अफसरों की मिलीभगत और ठेकेदारों की मनमानी से ग्रामीणों की योजनाएं धराशायी हो रही हैं। लेकिन लापरवाह अफसर और भ्रष्ट ठेकेदार पर कार्यवाही शून्य है।

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