आंध्र प्रदेश के ग्राम पंचायतों ने अपनी स्व-आय राजस्व मांग का लगभग 80% वसूल किया

Rashtrabaan

    आंध्र प्रदेश के 26 जिलों में 2025-26 वित्तीय वर्ष के दौरान ग्राम पंचायतों ने अपनी कुल मांग ₹1,285 करोड़ की राशि में से लगभग 80% की वसूली की है। यह आंकड़ा स्थानीय प्रशासन की क्षमता और गाँवों की वित्तीय स्वायत्तता को दर्शाता है।

    स्व-आय राजस्व (Own Source Revenue) के तहत ग्राम पंचायतों को अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर से करों और शुल्कों के माध्यम से संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है। इस पहल से ग्राम पंचायतों को संसाधनों की निर्भरता कम करने में मदद मिली है और वे जिला प्रशासन से स्वतंत्र होकर विकास कार्यों को सुचारू रूप से अंजाम दे पा रही हैं।

    आंध्र प्रदेश के ग्रामीण विकास विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कुल मांग ₹1,285 करोड़ थी, जिसमें से लगभग ₹1,028 करोड़ पंचायतों ने अपने स्रोतों से वसूल कर लिए। यह उपलब्धि पंचायत स्तर पर बेहतर प्रशासन, कर संग्रहण की प्रक्रियाओं में सुधार और लोगों की जागरूकता का परिणाम है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय आत्मनिर्भरता की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए फंड की उपलब्धता सुनिश्चित होती है। पंचायतों द्वारा वसूली गई राशि से सड़क निर्माण, स्वच्छता, जल आपूर्ति और अन्य बुनियादी ढांचे के कार्यों में तेजी आई है।

    सरकारी अधिकारियों ने बताया कि आगामी वर्षों में इस राजस्व वृद्धि को और बढ़ाने के लिए पंचायतों को और सक्षम बनाने के प्रयास जारी रहेंगे। उन्हें बेहतर तकनीकी संसाधनों और प्रशिक्षण के साथ समर्थित किया जाएगा, ताकि वे वसूली दक्षता और पारदर्शिता बनाए रख सकें।

    इस वित्तीय प्रगति का सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण जनता के जीवन स्तर पर भी देखा जा सकता है। बेहतर सेवाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और सामाजिक विकास की दिशा में भी उल्लेखनीय बदलाव आए हैं।

    निष्कर्षतः, आंध्र प्रदेश की ग्राम पंचायतों द्वारा स्व-आय राजस्व में लगभग 80% की वसूली ने स्थानीय प्रशासनिक ढांचे को मजबूत किया है और विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है।

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