पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदाता भागीदारी से हुआ लोकतंत्र का मजबूतीकरण, आठवले ने सुरक्षा व्यवस्था को बताया मुख्य कारण

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    मुंबई। देश की आज़ादी के बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में अभूतपूर्व मतदाता भागीदारी ने लोकतंत्र को एक नई मजबूती दी है। इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड मतदान को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है और विभिन्न दलों के बयान सामने आ रहे हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री एवं रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने शुक्रवार को इस बात पर विशेष प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे लोकतंत्र की प्रगति और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता का प्रमाण बताया।

    आठवले ने कहा कि पश्चिम बंगाल में 91 प्रतिशत से अधिक मतदान दर देखी गई जो आजादी के बाद सबसे अधिक है। उन्होंने इस तथ्य को सुरक्षा बलों की कुशल कार्रवाई और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा। उनका कहना था कि ममता बनर्जी के गुंडागर्दी करने वालों को इस बार मतदान प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं डालने दी गई, जिसकी वजह से आम जनता ने निडर होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

    उन्होंने लगातर लोकसभा में मतदान को अनिवार्य करने की मांग उठाई है और इसे एक महत्वपूर्ण कानून बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। आठवले ने उन 8-9 प्रतिशत मतदाताओं को भी मतदान के लिए प्रोत्साहित किया जो चुनावी प्रक्रिया से दूर रहे। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सक्रिय भागीदारी ने राष्ट्रीय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान की है।

    आठवले ने यह भी बयान दिया कि पश्चिम बंगाल में जल्द ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनने वाली है और तमिलनाडु में भी एनडीए को फायदा होने की संभावना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गुंडागर्दी विरुद्ध सख्त रुख का समर्थन करते हुए आठवले ने कहा कि अब प्रदेश में गुंडागर्दी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि ममता सरकार का अंत होगा और एनडीए की सरकार जनता की सेवा करेगी।

    चुनाव आयोग द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को जारी नोटिस को आठवले ने उचित कदम बताया। उन्होंने खड़गे की कुछ विवादित टिप्पणियों की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सम्मान के साथ संवाद होना चाहिए और प्रधानमंत्री के प्रति अपशब्दों का उपयोग स्वीकार्य नहीं।

    अंत में उन्होंने महाराष्ट्र में मराठी भाषा न जानने पर ड्राइवरों के लाइसेंस संबंधी विवाद पर भी अपनी राय दी। आठवले ने कहा कि मराठी भाषा सीखने का प्रावधान उचित है, लेकिन किसी गरीब ड्राइवर का लाइसेंस रद्द किया जाना अन्याय होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को इस मामले में सौहार्दपूर्ण और विवेकपूर्ण निर्णय लेना चाहिए।

    इस प्रकार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के रिकॉर्ड मतदान ने देश में लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया है और यह दर्शाता है कि जनता अपनी आवाज़ को मजबूती से उठाने के लिए तैयार है। सुरक्षा व्यवस्था एवं प्रशासकीय नियंत्रण ने इस मतदान को संभव बनाया है, जो सभी के लिए एक सकारात्मक संदेश है।

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