पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के चुनावी रंगत के बीच भाजपा के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि इस बार केवल हिंदू मतदाता ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे मुसलमान भी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से तंग आकर भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे। 29 अप्रैल को 142 सीटों पर दूसरे चरण का मतदान होना है, और चुनाव आयोग ने सुरक्षा को लेकर कड़े इंतजाम किए हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पहले चरण के मतदान में मुसलमानों ने लगभग 90 प्रतिशत वोट तृणमूल कांग्रेस को दिए थे, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। उन्होंने बताया कि हिंदुओं ने पहले चरण में 93 फीसदी वोटिंग की, और दूसरे चरण में भी हिंदू मतदाता पूरी तत्परता से मतदान करेंगे। महत्वपूर्व यह भी है कि अधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि कुछ पढ़े-लिखे मुसलमान ममता बनर्जी के शासन से नाखुश हैं और वे भाजपा को वोट देंगे। उनका यह भी कहना है कि यह मतदाता ‘वंदे मातरम’ से अभिप्रेत नहीं हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को समर्थन देना चाहते हैं।
भाजपा नेता ने गुजरात निकाय चुनावों के नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि वहां के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की है, जहां कई मुस्लिम उम्मीदवार भाजपा की ओर से विजयी रहे। यह संकेत है कि राष्ट्रवाद की भावना प्रबल हो रही है। पश्चिम बंगाल में भी ऐसा ही बदलाव देखने को मिल सकता है।
भाजपा की बंगाल में सरकार बनाने की उम्मीदें प्रबल
पहले चरण की 152 सीटों पर हुई रिकॉर्ड मतदान के बाद भाजपा ने जोर-शोर से दावा किया कि लोगों ने बदलाव के लिए भाजपा को वोट दिया है। अमित शाह ने एक रैली में कहा कि वे 152 में से 110 से अधिक सीटें जीत सकते हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने भी सत्ता में लौटने का दावा किया है। अब दूसरे चरण के मतदान के परिणाम राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे कि ममता बनर्जी फिर सत्ता में लौटती हैं या भाजपा अपनी पकड़ मजबूत कर लेती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, भवानीपुर सीट को विशेष रूप से देखा जा रहा है, जहां दोनों प्रमुख पार्टियों के कद्दावर नेता मैदान में हैं। इस क्षेत्र का परिणाम राज्य के राजनीतिक समीकरणों पर गहरा प्रभाव डालेगा।
इस बार के चुनाव में मतदाता वर्ग की बदलती सोच और नए गठबंधनों ने चुनावी मुकाबले को काफी संवेदनशील बना दिया है। शुभेंदु अधिकारी के ताजा दावे से एक बार फिर यह चुनाव राजनीतिक गर्माहट में आ गया है।
राज्य में चुनाव आयोग की नजरें भी सख्त हैं और सभी मतदाता केंद्रों पर मतदान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सबकी उम्मीद है कि लोकतंत्र की जीत होगी और जनता की वास्तविक आवाज परिधान बनी रहेगी।

