लखनऊ। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा स्वास्थ्य मंत्री से पत्रकार बने इस बयान पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर संवाद और पत्रकारिता की अहमियत बताते हुए कहा कि पत्रकारों को खलिहर बताना मेहनतकश समाज व मीडिया जगत का अपमान है।
ब्रजेश पाठक ने कहा कि संवाद भारतीय लोकतंत्र की पुरानी परंपरा है और झूठ के सौदागर सदैव सच्चाई और संवाद से डरते हैं। उन्होंने सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि महान जननेता अक्सर पत्रकार भी रहे हैं, जिन्होंने समाज और राष्ट्र की बेहतरी के लिए काम किया।
दरअसल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मंत्री नरेंद्र कश्यप की बातचीत को लेकर निशाना साधते हुए कहा था कि जो स्वास्थ्य मंत्री के रूप में साबित हो चुके हैं, वे अब पत्रकार बने हैं क्योंकि सरकार और संगठन में उनका कोई काम नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता बिजली, गर्मी और बीमारी के बीच तड़प रही है, जबकि भाजपा के मंत्री इंटरव्यू देते हुए समय बिताते हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख और डॉ. राममनोहर लोहिया जैसे महान विचारक संवाद और पत्रकारिता के अभिन्न अंग थे। उन्होंने कहा कि संवाद और साक्षात्कार हमारी सनातन परंपरा का हिस्सा हैं और लोकोपकार के लिए जरूरी भी है। उन्होंने बताया कि पत्रकारों को खलिहर कहना पूरी तरह अनुचित और अपमानजनक है।
ब्रजेश पाठक ने आगे कहा, “जिस तरह पंडित दीनदयाल जी मासिक पत्रिका ‘राष्ट्रधर्म’ निकालते थे, और लोहिया जी ‘जन’ तथा ‘मैनकाइंड’ के संपादक रहे, उसी परंपरा को आज भी हम निभा रहे हैं। विभिन्न विचारों के बीच संवाद लोकतंत्र को मजबूत करता है, और तानाशाह ही संवाद के विरोधी होते हैं।”
वहां उन्होंने यह भी कहा कि युवा और मेहनतकश लोगों को बुरा माना जाता है जबकि झूठ फैलाने वाले संवाद से डरते हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ने कहा कि एक स्वास्थ्य मंत्री के रूप में वह लोक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं, और संवाद जारी रख कर अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।
ज्ञात हो कि ब्रजेश पाठक ने हाल ही में पिछड़ा वर्ग के मंत्री नरेंद्र कश्यप के साथ एक वीडियो जारी किया है जिसमें वे सपा शासन और भाजपा सरकार की तुलना करते नजर आए। इस बातचीत में उन्होंने पीडीए समूह पर भी निशाना साधा है।
इस पूरी बहस से स्पष्ट है कि संवाद और पत्रकारिता को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है, और यह दर्शाता है कि लोकतंत्र में विविध विचारों को सम्मानित करना कितना आवश्यक है।

