देश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों से पारा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। खासतौर पर दिल्ली में तापमान ने 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाकर गर्मी की तीव्रता को बढ़ा दिया है। इस बढ़ते तापमान ने आम जनता के साथ-साथ संवेदनशील और कमजोर वर्गों के लिए भी चिंता बढ़ा दी है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कई राज्यों में तापमान में असामान्य वृद्धि हुई है जिससे हीट वेव की स्थिति बन गई है। विशेषज्ञों ने इस बढ़ते तापमान को जलवायु परिवर्तन और मौसमी अस्थिरताओं से जोड़कर देखा है।
वरिष्ठ अधिकारीयों ने बताया कि खासकर वृद्ध, बच्चे, गर्भवती महिलाएं, और बिना ठंडे स्थान वाले मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधी कई जटिलताएं, जैसे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन आदि, बढ़ने की संभावना है। इसलिए इन समूहों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।
NHRC ने 21 राज्यों और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वे संवेदनशील समूहों के लिए विशेष सुरक्षा कदम उठाएं, जैसे कि नियमित स्वास्थ्य जांच, ठंडे पानी की उपलब्धता, राहत शिविरों की स्थापना, और सार्वजनिक जागरूकता अभियान। ये कदम गर्मी की लहर से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने में सहायक होंगे।
इसके साथ ही, नागरिकों को खुद भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। जैसे कि दिन के ज्यादा गर्म समय में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, हल्के और ढीले कपड़े पहनें, तथा सूरज के सीधे संपर्क से बचें।
सरकारी एजेंसियां भी भविष्य में ऐसी हीट वेव की स्थिति से निपटने के लिए बेहतर रणनीतियों और पूर्वानुमान तकनीकों को लागू कर रही हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए यह जरूरी है कि हम अपने जीवनशैली और पर्यावरण की रक्षा के लिए तत्काल कदम उठाएं।
गर्मी की इस तीव्रता से निजात के लिए हर स्तर पर सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं ताकि vulnerable वर्गों को सुरक्षित रखा जा सके और जनमानस में जागरूकता बढ़ाई जा सके।

