सिवनी हवाला कांड में डीएसपी पंकज मिश्रा और दो आरोपियों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, FIR रद्द करने के आदेश

Rashtrabaan

    सिवनी हवाला कांड एक बार फिर सुर्खियों में है, जब इस मामले की सुनवाई कर रही हाई कोर्ट ने आरोपियों को बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने डीएसपी पंकज मिश्रा, आरक्षक प्रमोद सोनी और व्यापारी पंजू गिरी गोस्वामी की याचिका पर सुनवाई के बाद एफआईआर रद्द करने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, इसी केस में आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज कर दी गई है।

    यह मामला पिछले साल अक्टूबर में सामने आया था, जब पुलिस ने सीलादेही चौक पर महाराष्ट्र के हवाला कारोबारी सोहन लाल परमार की कार से 2.96 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की थी। विवाद तब शुरू हुआ जब पुलिस रिकॉर्ड में केवल 1.45 करोड़ रुपये की रकम दर्ज की गई। इस पर आरोप लगे कि रकम की असली मात्रा छुपाई गई। इसके बाद लखनवाड़ा थाना में सिवनी पुलिस की तत्कालीन एसडीओपी पूजा पाण्डेय और डीएसपी पंकज मिश्रा सहित 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

    हाई कोर्ट ने दी तीन आरोपियों को राहत

    हाई कोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई में तीन आरोपियों के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पैरवी की। कोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया। कोर्ट के अनुसार, मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं जो साजिश या आपसी मिलीभगत साबित करते हों।

    कोर्ट का निर्णय: आरोप आधारहीन और शक पर आधारित

    हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मामला केवल अनुमान और संदेह पर आधारित है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर कोई अपराध सिद्ध नहीं होता। इसका कोई सुनिश्चित सबूत नहीं मिला है कि आरोपितों के बीच मिलीभगत या अपराधिक साजिश रची गई हो।

    चार्जशीट और आपराधिक कार्यवाही पर रोक

    कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 310(2), 126(2), 140(3), 61(2) और 238(b) के अनुसार यह माना कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा चलाना कानून का दुरुपयोग होगा। इसलिए चार्जशीट को निरस्त करते हुए आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का निर्देश दिया।

    आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका खारिज

    हालांकि, आरक्षक नीरज राजपूत की याचिका को कोर्ट ने खारिज किया है। कोर्ट के अनुसार, उसने टीम के साथ कार रोकी और रकम की जब्ती में भूमिका निभाई थी, इसलिए उसके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल शक और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर किसी व्यक्ति को बिना ठोस सबूत के आपराधिक मुकदमे में नहीं लाया जा सकता। यह फैसला जांच एजेंसियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल है कि अब उन्हें गंभीर मामलों में स्पष्ट और मजबूत साक्ष्य पेश करना होगा।

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