मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता राज ठाकरे ने महाराष्ट्र दिवस समारोह को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सरकार के रवैये को आधा-अधूरा और उदासीन बताया, जिससे इस महत्वपूर्ण दिन का सम्मान घट रहा है। मुख्यमंत्री के हुतात्मा चौक पर श्रद्धांजलि देने के बाद राज ठाकरे भी वहां पहुंचे और संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के शहीदों को नमन किया।
राज ठाकरे ने हुतात्मा चौक के कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि महाराष्ट्र दिवस को सरकार केवल एक औपचारिकता की तरह मना रही है। वर्षों से वे यह अनुभव कर रहे हैं कि सरकार इस दिन को राज्य के गौरव का उत्सव समझने के बजाय सिर्फ एक सरकारी रस्म के तौर पर देखती है।
उन्होंने कहा कि हुतात्मा स्मारक को ठीक तरीके से सजाया नहीं गया था और पूरे आयोजन में सरकारी लापरवाही और उदासीनता साफ झलक रही थी। राज ठाकरे ने एक सवाल उठाया कि क्या सरकार केंद्र सरकार के नेताओं को नाराज न करने के लिए महाराष्ट्र दिवस के आयोजन को छोटा करने पर मजबूर है? उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि क्या सरकार को डर है कि यदि महाराष्ट्र दिवस धूमधाम से मनाया गया तो दिल्ली के बड़े नेता नाराज हो जाएंगे।
मनसे प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि यदि यह कोई अन्य समुदाय या खास आयोजन होता, तो सड़कों पर कालीन बिछाए जाते और पूरे शहर को रोशनी से सजाया जाता, लेकिन महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता से जुड़े इस दिन को उदासी के साथ मनाया जा रहा है।
उन्होंने सरकार के साथ-साथ आम जनता की भी उदासीनता पर चिंता जताई और सवाल उठाया कि क्या मराठी लोगों को हुतात्मा स्मारक के महत्व से दूर करने की साजिश हो रही है। राज ठाकरे ने कहा कि हुतात्मा स्मारक हर महाराष्ट्रवासी के लिए तीर्थ स्थल की तरह होना चाहिए और इसे उचित सम्मान मिलना चाहिए।
राज ठाकरे ने कहा कि मराठी लोगों ने मुंबई को बसाया और इस शहर के विकास के लिए संघर्ष किया है, लेकिन आज वे अपने इतिहास से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने मराठी समाज से अपील की कि वे संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के संघर्ष को कभी न भूलें क्योंकि मुंबई की सारी ऊंची-ऊंची इमारतें इस शहर को महाराष्ट्र का हिस्सा बनाये रखने के संघर्ष की देन हैं।
उन्होंने मराठी लोगों से हाथ जोड़कर निवेदन किया कि वे इस गर्व से जुड़ी हुई विरासत को संभालें और प्रत्येक महाराष्ट्र दिवस पर इसे गौरवान्वित करें। अंत में राज ठाकरे ने मुंबई और पूरे महाराष्ट्र के मराठी लोगों से आग्रह किया कि अगले वर्ष 1 मई को बड़ी संख्या में हुतात्मा स्मारक पर एकत्रित हों ताकि सरकार को मजबूर होकर इस दिन को उसका उचित स्थान और सम्मान देना पड़े। इससे महाराष्ट्र दिवस को फिर से राज्य के गौरव का प्रतीक बनाया जा सकेगा।

